समृद्ध ग्राम पंचायतों को डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम, 48 जिलों की 277 पंचायतों में ‘डिजिटल एक्सेस कमेटी’ का गठन

48 जिलों की 277 पंचायतों में ‘डिजिटल एक्सेस कमेटी’ का गठन



लखनऊ , उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भारतनेट के ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ उठाते हुए समृद्ध ग्राम पंचायतों को डिजिटल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पहल के तहत पंचायत स्तर पर ‘डिजिटल एक्सेस कमेटी’ (DAC) का गठन किया गया है, जो ग्रामीणों तक इंटरनेट आधारित सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करेगी।

समिति का गठन ग्राम पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में किया गया है। इसमें संबंधित ग्राम सचिव, स्कूल के उपाध्यक्ष, प्रतिष्ठित व्यक्ति और भारत नेट के उद्यमी आदर्श सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। यह समिति जमीनी स्तर पर टेली-मेडिसिन (ई-संजीवनी), स्मार्ट शिक्षा, ई-गवर्नेंस सेवाएं (जैसे आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी) तथा कृषि संबंधी जानकारी (मौसम और फसल) जैसी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।

उत्तर प्रदेश (पूर्व) लाइसेंस सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 48 जिलों की 277 समृद्ध ग्राम पंचायतों में यह पहल लागू की जा रही है। अब तक 170 ग्राम पंचायतों में डिजिटल एक्सेस कमेटी का गठन किया जा चुका है, जबकि शेष पंचायतों में गठन की प्रक्रिया जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से तेजी से जारी है।

डिजिटल एक्सेस कमेटी के माध्यम से पंचायतों में स्थापित सार्वजनिक FTTH कनेक्शनों—जो ग्राम पंचायत कार्यालय, प्राथमिक विद्यालयों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगाए गए हैं—में आवश्यक डिजिटल उपकरण जैसे कंप्यूटर, मॉडेम, लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल और डिजिटल हस्ताक्षर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही कनेक्शन शुल्क और भुगतान के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था भी जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से की जाएगी।

दूरसंचार विभाग ने प्रत्येक जिले के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जो डिजिटल एक्सेस कमेटी के साथ समन्वय कर इंटरनेट सेवाओं की अधिकतम उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

अपर महानिदेशक वर्मा ने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं का पूरा लाभ तभी मिल सकता है, जब भूमिगत ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण या पाइपलाइन बिछाने जैसे कार्यों के दौरान फाइबर के क्षतिग्रस्त होने से इंटरनेट सेवाएं बाधित होती हैं और जनता को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

इस समस्या के समाधान के लिए दूरसंचार विभाग ने ‘कॉमन ब्रॉडबैंड डक्ट’ (CBuD) मोबाइल एप (https://cbud.gov.in) की शुरुआत की है। यह एप खुदाई करने वाली एजेंसियों और भूमिगत संपत्तियों के मालिकों को एक मंच पर लाता है। CBuD एप को गूगल प्ले स्टोर और एप्पल एप स्टोर से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है।

एप के माध्यम से खुदाई शुरू करने से पहले संबंधित एजेंसियां अपनी जानकारी दर्ज कर सकती हैं, जिससे पहले से बिछाई गई ऑप्टिकल फाइबर और अन्य भूमिगत संरचनाओं की जानकारी मिल सके। इससे खुदाई के दौरान केबल कटने की घटनाओं पर रोक लगेगी और इंटरनेट सेवाओं में बाधा कम होगी।

अपर महानिदेशक वर्मा ने सभी सरकारी और निजी खुदाई एजेंसियों से अपील की है कि वे CBuD एप का अनिवार्य रूप से उपयोग करें, ताकि खुदाई के दौरान ऑप्टिकल फाइबर को क्षति पहुंचने की संभावना न्यूनतम हो और आम जनता को निर्बाध दूरसंचार सेवाएं मिलती रहें।