शिक्षा के मंदिर में मौत का करंट: स्कूल और बिजली विभाग की लापरवाही से हाई वोल्टेज की चपेट में आई मासूम

कुशीनगर। जनपद के पड़रौना नगर पालिका क्षेत्र में संचालित गायत्री विद्यापीठ में सोमवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। विद्यालय प्रशासन और विद्युत विभाग की घोर लापरवाही के कारण लंच ब्रेक के दौरान कक्षा तीन की दस वर्षीय छात्रा शालू हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गई। इस हादसे को लोग दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का नतीजा बता रहे हैं।
बताया जा रहा है कि विद्यालय भवन के ऊपर से लंबे समय से हाई वोल्टेज विद्युत लाइन गुजर रही थी, जो किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकती थी। इसके बावजूद न तो स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम किए, न ही विद्युत विभाग ने लाइन को हटाने या सुरक्षित करने की जरूरत समझी। न चेतावनी बोर्ड लगाए गए, न सुरक्षा घेरा बनाया गया। सोमवार को लंच के समय खेल रही मासूम शालू अचानक करंट की चपेट में आ गई और गंभीर रूप से झुलस गई।
घटना के बाद विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षकों और कर्मचारियों ने आनन-फानन में बच्ची को जिला मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। सूचना मिलने पर पिता मुन्ना प्रसाद, जो पेशे से ऑटो चालक हैं, अस्पताल पहुंचे। गरीब परिवार के लिए इलाज का खर्च और बेटी की जिंदगी की जंग किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।
इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। जब स्कूल परिसर के ऊपर से जानलेवा हाई वोल्टेज लाइन गुजर रही थी, तो ऐसे स्थान पर विद्यालय संचालन की अनुमति कैसे दी गई? क्या मान्यता देने से पहले सुरक्षा मानकों की जांच हुई थी या सब कुछ केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रहा? यदि विद्यालय के संचालन के बाद हाई वोल्टेज लाइन डाली गई, तो बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे हटाने या सुरक्षित करने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए?
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते हाई वोल्टेज लाइन को सुरक्षित किया गया होता, तो आज एक मासूम अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग नहीं लड़ रही होती। लोगों ने दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, विद्यालय की मान्यता रद्द करने और बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल मासूम शालू का इलाज जारी है और पूरा इलाका उसके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहा है, वहीं यह घटना प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई है।