
सूरतगंज (बाराबंकी)। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बतनेरा के मजरा ललपुरवा गांव को आजादी के सात दशक बाद आखिरकार पक्की सड़क की सौगात मिल गई है। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए पक्के रास्ते का निर्माण कार्य शुरू हो गया है, जिससे सरयू नदी की बाढ़ के कारण हर साल होने वाली आवागमन की समस्या से ग्रामीणों को स्थायी राहत मिलेगी।
अब तक ललपुरवा गांव की पहचान एक ऐसे इलाके के रूप में थी, जहां विकास योजनाएं केवल कागजों तक सिमटी रही थीं। गांव तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक कच्चा, गड्ढों से भरा रास्ता था, जो बरसात और बाढ़ के समय पूरी तरह जलमग्न हो जाता था। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को नाव के सहारे आवागमन करना पड़ता था। बीमारों को अस्पताल ले जाना, बच्चों का स्कूल जाना और रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति करना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था।
अब हेतमापुर संपर्क मार्ग से ललपुरवा गांव तक लगभग 650 मीटर लंबे मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। इस मार्ग पर पुलिया, मिट्टी पटाई और खड़ंजा लगाया जाएगा, ताकि बाढ़ के दौरान भी गांव का संपर्क बना रहे। इस कार्य के लिए जिला पंचायत की ओर से लगभग 18 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।
ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन भी किए थे। इसके बाद जिला पंचायत पति राममूर्ति निषाद और ग्राम प्रधान पति अमरीश अवस्थी ने भूमि पूजन कर निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया।
निर्माण कार्य शुरू होने से गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बन जाने से सबसे अधिक लाभ बच्चों और बुजुर्गों को मिलेगा। अब स्कूल जाने वाले बच्चों को पानी पार नहीं करना पड़ेगा और आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। साथ ही खेती से जुड़ी उपज को बाजार तक ले जाना भी आसान होगा।
गांव के कन्हैया लाल लोधी, प्यारे लाल, राजेंद्र निषाद, आनंद और राजेश रावत का कहना है कि उन्होंने कई पीढ़ियों को इसी कच्चे रास्ते के सहारे जीवन गुजारते देखा है। चुनाव आते-जाते रहे और वादे भी हुए, लेकिन अब पहली बार ऐसा लग रहा है कि ललपुरवा गांव को वास्तव में विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा