
शाहाबाद (हरदोई)। नगर में इन दिनों बंदरों को पकड़वाने की होड़ ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। छोटे–छोटे पिंजरों में बड़े–छोटे दर्जनों बंदर ठूंसे जा रहे हैं। जिन मासूमों को न कपड़ा चाहिए, न मकान—सिर्फ पेट भरने जितनी रोटी—वे आज मनुष्यों की स्वार्थी मानसिकता के सबसे बड़े शिकार बन गए हैं। कई लोग खुद को ‘तीसमार खाँ’ समझकर एयरगन से छर्रे मारकर बंदरों को घायल कर रहे हैं।
बंदर अपनी प्राकृतिक मौत तक किसी पर बोझ नहीं बनते। उनके परिजन बिना किसी को परेशान किए अंतिम संस्कार कर देते हैं, फिर भी इन निस्वार्थ जीवों को ‘उत्पाती’ बताकर सुर्खियों में बदनाम किया जा रहा है। वहीं नगर में असल आतंक फैलाने वाले दबंगों और बाहुबलियों पर कोई आवाज तक नहीं उठती।
इधर, वन विभाग, नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गहरे सवाल उठ रहे हैं। बंदरों को कहाँ छोड़ा जा रहा है, इसका आज तक कोई वीडियो या प्रमाण जनता के सामने नहीं रखा गया। वानर–प्रेमियों ने मांग की है कि पकड़ने से लेकर जंगल में छोड़ने तक की प्रक्रिया का वीडियो सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा यह मामला तस्करी और क्रूरता की श्रेणी में आ खड़ा होगा।
छोटे पिंजरों में बंदरों को कैद करना, उन्हें डंडों से मारना, रस्सियों से घसीटना और एयरगन से घायल करना—यह सब न केवल वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है बल्कि सनातन समाज के लिए भी शर्मनाक है। विडंबना यह कि बड़े मंगल पर बंदरों को प्रसाद देने वाले लोग भी अब उनकी पीड़ा पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
सोशल मीडिया पर वानर–प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि बंदरों को पकड़े जाने की हर गाड़ी का वीडियो सार्वजनिक होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे तस्करी की आशंका के तहत कानूनी कार्रवाई करेंगे। उनका कहना है कि इंसान को पहले इंसानियत सीखनी चाहिए, तभी जानवरों पर आतंकी होने का आरोप लगाने का नैतिक अधिकार बनता है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, भाजपा जैसे संगठन और वन विभाग के अधिकारी मौन हैं। वन रेंज अधिकारी नीलम मौर्या का कहना है कि उन्हें बंदर पकड़े जाने की कोई जानकारी नहीं है और न ही उनका कोई कर्मचारी इसमें शामिल है—यह बयान और भी बड़े सवाल खड़े करता है।
शाहाबाद में बंदरों को पकड़ने की यह प्रक्रिया अब मानवीयता बनाम क्रूरता का मुद्दा बन चुकी है। जब तक प्रशासन जंगल में छोड़ने का ठोस प्रमाण नहीं देगा, सवाल उठते रहेंगे और मासूम बंदरों की पीड़ा हर दिन इंसानों की संवेदनहीनता की कहानी बयां करती रहेगी।