
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन भवन सभागार में विभाग की प्रमुख और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी निर्माण कार्य समयबद्धता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में फिरोजाबाद में निर्माणाधीन ग्लास म्यूजियम, मैनपुरी का कल्चरल सेंटर, आर्य गुरुकुल म्यूजियम और सामौर बाबा मंदिर कॉम्प्लेक्स सहित वृहद परियोजनाओं की प्रगति का गहन अवलोकन किया गया।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि फिरोजाबाद में 47 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रहा ग्लास म्यूजियम लगभग 70 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। मेक इन इंडिया के तहत विकसित हो रहा यह देश का पहला ग्लास म्यूजियम होगा, जिसमें हड़प्पा काल से लेकर यूरोप और अन्य देशों तक फिरोजाबाद के कांच उद्योग की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाया जाएगा। म्यूजियम में एआर/वीआर जोन, संस्कृति से जुड़ी जानकारी, लाइब्रेरी और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित गैलरियां पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होंगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्माण में नवाचार का स्वागत है, लेकिन सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मंत्री को म्यूजियम के आधुनिक और भव्य आंतरिक स्वरूप की जानकारी दी गई। तीन मंजिला इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के म्यूजियम में एक ही छत के नीचे शहर की विरासत, कला और शिल्प को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें इतिहास गैलरी, प्रोडक्ट गैलरी, डिजिटल गैलरी, सोविनियर गैलरी सहित अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। मंत्री ने सुझाव दिया कि गैलरियों में ब्रज, वृंदावन, नीम करौरी, बटेश्वर और रपड़ी जैसे सांस्कृतिक व धार्मिक स्थलों के कलात्मक चित्रण को भी शामिल किया जाए।
म्यूजियम में फिरोजाबाद की वैश्विक पहचान बनी चूड़ियों सहित ग्लास कटिंग, जरी, डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया को विस्तार से प्रदर्शित किया जाएगा। लाइव ग्लास ब्लोइंग के माध्यम से शिल्पकारों की कला को सजीव रूप में देखने का अवसर भी पर्यटकों को मिलेगा। सभी जानकारियां हिंदी और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध होंगी। बच्चों के लिए इंटरेक्टिव जोन, फ्लिप बुक जोन और बारकोड स्कैन के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
मंत्री ने मैनपुरी में निर्माणाधीन कल्चरल सेंटर की डिजाइन और क्यूरेशन प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि यहां राजा तेज सिंह से जुड़ा इतिहास, मैनपुरी की पहचान, ऋषियों की भूमि, 800 सीटों वाला ऑडिटोरियम, एंट्रेंस गैलरी, एग्जीबिशन हॉल, सोविनियर स्टॉल, वॉच टावर और रिसेप्शन जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। विभिन्न गैलरियों के माध्यम से आस्था, वीरों की भूमि, स्थानीय कला-संस्कृति, राजपूत राजाओं के शासनकाल, पक्षी विहार और तारकशी के इतिहास को प्रदर्शित किया जाएगा। महाभारत काल और पांचाल के इतिहास को डिजिटल स्क्रीन और होलोग्राफिक प्रोजेक्शन के जरिए दिखाया जाएगा। बच्चों के लिए एआर/वीआर तकनीक के अधिक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया।
आर्य गुरुकुल म्यूजियम की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि यह केंद्र आर्य समाज की गौरवशाली परंपरा और उससे जुड़ी महान विभूतियों के जीवन, विचार और योगदान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाएगा। यहां वीडियो वॉल, डिजिटल माध्यम से वेद अध्ययन, लाइब्रेरी और एआर/वीआर आधारित प्रयोग दर्शकों को नया अनुभव देंगे। इसके साथ ही सामौर बाबा मंदिर कॉम्प्लेक्स के विकास कार्यों की समीक्षा में बताया गया कि बढ़ती पर्यटक संख्या को देखते हुए परिसर में वेटिंग सुविधा, वाटर फाउंटेन, पार्किंग और साइनेज का विकास किया जा रहा है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भावी पीढ़ी के सामने प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करना है। आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे नई पीढ़ी से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है।
बैठक में पर्यटन महानिदेशक डॉ. वेदपति मिश्रा, यूपीएसटीडीसी के एमडी आशीष कुमार, पर्यटन मंत्री के सलाहकार जेपी सिंह, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अंजू चौधरी, संस्कृति विभाग के अधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।