टूनैट तकनीक बनी टीबी के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार

बहराइच। क्षय रोग (टीबी) के उन्मूलन की दिशा में बहराइच जिला लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। आधुनिक टूनैट (TruNat) तकनीक ने जिले में टीबी की पहचान को न केवल तेज किया है, बल्कि पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक और भरोसेमंद भी बना दिया है। पारंपरिक स्मियर माइक्रोस्कोपी की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए अब टीबी की शुरुआती अवस्था, फेफड़ों के बाहर होने वाली टीबी और जटिल मरीजों में भी बीमारी की समय पर पहचान संभव हो पा रही है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा के अनुसार माइक्रोस्कोप आधारित जांच में संवेदनशीलता कम होने के कारण कई मामलों में टीबी की पहचान नहीं हो पाती थी, विशेषकर एचआईवी और मधुमेह से पीड़ित मरीजों में। उन्होंने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक तृतीयक स्वास्थ्य संस्थान में किए गए अध्ययन में 4,249 नमूनों की जांच के दौरान माइक्रोस्कोपी से केवल 4.3 प्रतिशत मामलों में टीबी की पुष्टि हुई, जबकि टूनैट जांच से 13.7 प्रतिशत मामलों में बीमारी की स्पष्ट पहचान हुई। यह अंतर टूनैट तकनीक की प्रभावशीलता को साफ दर्शाता है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि जनवरी से नवंबर के बीच जिले में लगभग पांच लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान करीब 95 हजार एक्स-रे कराए गए और 52 हजार से अधिक सैंपलों की जांच टूनैट मशीनों से की गई। इन उन्नत जांचों का परिणाम यह रहा कि जिले में 9 हजार से अधिक टीबी मरीजों की समय रहते पहचान हो सकी। इससे मरीजों को समय पर इलाज मिला और संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में भी बड़ी सफलता मिली।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि जिले के सभी 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टूनैट मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं। इनसे हर महीने औसतन 6 से 7 हजार जांचें की जा रही हैं। यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है। निजी चिकित्सकों को भी प्रेरित किया जा रहा है कि वे संदिग्ध मरीजों को टूनैट जांच के लिए सरकारी केंद्रों पर रेफर करें, ताकि कोई भी मरीज जांच और इलाज से वंचित न रहे।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि टूनैट जैसी आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग से टीबी के खिलाफ लड़ाई और मजबूत होगी। समय पर पहचान और उपचार से जहां मरीजों की जान बच रही है, वहीं समाज को भी इस संक्रामक बीमारी से सुरक्षित किया जा रहा है। बहराइच में टूनैट जांच अब सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि टीबी उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक हथियार बन चुकी है।