लोकायुक्त से लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ तक: विधानसभा में गरजा विपक्ष, सीएम योगी का पलटवार—‘यूपी अब उत्सव प्रदेश’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र में गुरुवार को लोकायुक्त रिपोर्ट, डीजीपी नियुक्ति, एनकाउंटर नीति, गैंगस्टर एक्ट, रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार को घेरते हुए लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखने की मांग की, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और कहा कि “आज यूपी उपद्रव नहीं, उत्सव प्रदेश है।”
लोकायुक्त और डीजीपी नियुक्ति पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकायुक्त जांच रिपोर्ट में कई अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, इसलिए उसे सदन में रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में लोकायुक्त की नियुक्ति को आठ वर्ष हो चुके हैं, इस पर भी सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
डीजीपी नियुक्ति को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के बाद राज्य सरकार ने जो दिशा-निर्देश बनाए, उनका समुचित पालन नहीं किया जा रहा है। “स्वतंत्र डीजीपी रहेगा तो सही काम करेगा,” उन्होंने कहा।
एनकाउंटर, बुलडोजर और गैंगस्टर एक्ट पर घेराव
माता प्रसाद पांडेय ने दावा किया कि सरकारी आंकड़ों में 262 एनकाउंटर दर्ज हैं। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई और गैंगस्टर एक्ट के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई मामलों में कानून का दुरुपयोग हो रहा है। उनका आरोप था कि कभी-कभी निचले स्तर पर व्यक्तिगत नाराजगी में भी गैंगस्टर एक्ट लगा दिया जाता है। उन्होंने कानून में संशोधन की मांग की।
रोजगार, पलायन और उद्योगों पर चिंता
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जीडीपी बढ़ने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन बेरोजगारी पर ठोस जवाब नहीं है। उन्होंने छोटे उद्योगों को रोजगार का बड़ा माध्यम बताते हुए कहा कि कानपुर जैसे औद्योगिक शहरों में पुराने उद्योग बंद पड़े हैं। कोविड काल में हुए पलायन का जिक्र करते हुए उन्होंने सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की अपील की, जिससे प्रदेश से बाहर मजदूरों का पलायन रुके।
नरेगा में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब तक कमीशन की व्यवस्था खत्म नहीं होगी, गुणवत्ता पूर्ण कार्य संभव नहीं है। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में घोषणाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए।
सीएम का पलटवार: ‘समस्या से समाधान की यात्रा’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष का आचरण मर्यादा के अनुरूप नहीं था। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में कर्फ्यू, दंगा और संगठित अपराध आम बात थे, लेकिन अब कानून का राज स्थापित हुआ है।
सीएम ने दावा किया कि छह करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है, हर घर शौचालय, नल जल और मुफ्त राशन जैसी योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की टॉप थ्री इकोनॉमी में शामिल हो चुका है और यह “समस्या से समाधान” की नौ वर्ष की यात्रा का परिणाम है।
महिला सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि दो लाख से अधिक पुलिस भर्तियों में 20 प्रतिशत महिलाओं को स्थान दिया गया है और महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 44 हजार तक पहुंची है। तीन नई महिला पीएसी यूनिट के गठन की भी घोषणा की गई।
सदन में गरमाहट, मुद्दों पर सियासी धार
लोकायुक्त रिपोर्ट, कानून-व्यवस्था, रोजगार और विकास के दावों को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखे। जहां विपक्ष ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की, वहीं सरकार ने विकास, सुरक्षा और सुशासन को अपनी उपलब्धि बताया। विधानसभा का यह सत्र प्रदेश की राजनीति में आगामी दिनों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।