UP ने बनाई औद्योगिक विकास में नई पहचान: कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर से मिली रफ्तार

लखनऊ। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। अप्रैल 2017 से अब तक प्रदेश में 17,841 नए कारखाने पंजीकृत किए गए हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि आजादी के बाद वर्ष 1947 से मार्च 2017 तक करीब 70 वर्षों में प्रदेश में कुल 14,178 कारखाने ही पंजीकृत हुए थे। वर्तमान में प्रदेश में कुल पंजीकृत कारखानों की संख्या बढ़कर 32,019 तक पहुंच गई है, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति को दर्शाती है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से निवेश को मिला बढ़ावा

प्रमुख सचिव श्रम एवं रोजगार डॉ. एमके शनमुगा सुंदरम के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। इस दिशा में सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को प्राथमिकता देते हुए निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन क्लीयरेंस, भूमि बैंक, मजबूत कानून-व्यवस्था और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

अप्रैल 2017 के बाद पंजीकृत 17,841 कारखानों में वर्तमान में 16,53,179 लोगों को रोजगार मिला है, जिनमें 15,29,907 पुरुष और 1,23,272 महिलाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि सितंबर 2023 से अब तक 10,194 कारखाने पंजीकृत हुए हैं, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में ही 4,746 नए कारखाने जुड़े हैं।

हर क्षेत्र में उद्योग, क्षेत्रीय संतुलन पर जोर

प्रदेश में औद्योगिक विकास को संतुलित बनाने के लिए सभी क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा दिया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 10,895 कारखाने पंजीकृत हुए हैं, जबकि मध्य उत्तर प्रदेश में 3,526, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3,205 और बुंदेलखंड क्षेत्र में 215 कारखाने स्थापित किए गए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार ने क्षेत्रीय असमानता को कम करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली है।

एमएसएमई से लेकर बड़े उद्योगों तक मिला समान प्रोत्साहन

औद्योगिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के साथ-साथ बड़े उद्योगों को भी बढ़ावा दिया है। प्रदेश में 14,412 कारखाने ऐसे हैं, जहां 100 तक श्रमिक कार्यरत हैं, जबकि 3,213 कारखानों में 101 से 1000 तक श्रमिक काम कर रहे हैं। वहीं 118 बड़े कारखाने ऐसे हैं, जिनमें 1000 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। यह संतुलन राज्य की औद्योगिक संरचना को मजबूती प्रदान कर रहा है।

कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर से मिली रफ्तार

प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने में मजबूत कानून-व्यवस्था और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका रही है। सरकार द्वारा एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम किया गया है। सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिलने से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है, जिसका सीधा असर औद्योगिक निवेश पर पड़ा है।

इन प्रयासों के चलते उत्तर प्रदेश अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि तेजी से एक औद्योगिक राज्य के रूप में उभर रहा है। नए कारखानों ने न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है, जिससे लाखों परिवारों की आजीविका को सहारा मिला है।