गोमती तट पर सजेगी देवभूमि की आत्मा, 15 दिन तक लोक-संस्कृति का महाकुंभ

लखनऊ, 13 जनवरी। पर्वतीय महापरिषद के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर उत्तराखण्ड की लोक-संस्कृति, परंपरा और आस्था का भव्य संगम राजधानी लखनऊ में देखने को मिलेगा। 14 जनवरी से 28 जनवरी तक गोमती तट स्थित पं. गोविन्द बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में 15 दिवसीय उत्तरायणी कौथिग का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर पर्वतीय समाज में खासा उत्साह है और तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश चन्द्र जोशी ने बताया कि उत्तरायणी कौथिग का विधिवत उद्घाटन 14 जनवरी को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे। आयोजन के दौरान सांसदों, मंत्रियों, विधायकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों की मौजूदगी रहेगी। यह कौथिग न केवल सांस्कृतिक पर्व है, बल्कि उत्तराखण्ड की पहचान और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा।
महासचिव महेन्द्र सिंह रावत ने जानकारी दी कि उद्घाटन दिवस पर दोपहर 2 बजे रामलीला मैदान, महानगर से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। सजे-धजे रथों, रंग-बिरंगी झांकियों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ यह शोभायात्रा नीलमथा, तेलीबाग, कल्याणपुर, गोमती नगर, सरोजनी नगर, इन्दिरा नगर, राजाजीपुरम, एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड, विकास नगर, कुर्मांचल नगर, सीतापुर रोड सहित विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए कौथिग स्थल तक पहुंचेगी। शोभायात्रा में शामिल महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में नाचते-गाते हुए देवभूमि की संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन करेंगे।
गोमती तट पर आयोजित होने वाले इस कौथिग के लिए स्टालों और मंच का निर्माण बड़े स्तर पर किया गया है। मुख्य मंच पर 10 फुट ऊंची और 28 फुट लंबी एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। मंच के दोनों ओर उत्तराखण्ड के पारंपरिक घरों के छायाचित्र लगाए गए हैं, जिससे पूरा परिसर देवभूमि की झलक प्रस्तुत करता है। कौथिग में उत्तराखण्ड की प्रमुख बाजारों के नाम पर सजाए गए स्टालों में पारंपरिक खाद्य पदार्थ, ऊनी वस्त्र, हस्तशिल्प, बाल मिठाई सहित कई स्थानीय उत्पाद उपलब्ध रहेंगे।
उत्तरायणी कौथिग के मंच से प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी विशिष्ट सेवाओं के लिए अनेक सम्मान प्रदान किए जाएंगे। इनमें पर्वत गौरव सम्मान, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली वीरता सम्मान, गौरा देवी महिला सम्मान, डॉ. एम.सी. पंत चिकित्सा सम्मान, श्यामाचरण काला पत्रकारिता सम्मान, बी.एम. शाह नाट्य कला सम्मान, गोपाल उपाध्याय साहित्य सम्मान, रणवीर सिंह बिष्ट कला सम्मान, देबकी नन्दन पाण्डेय उद्घोषक सम्मान, गोविन्द नयाल सामाजिक सेवा सम्मान, दीवान सिंह डोलिया लोक कला सम्मान और युवा सम्मान प्रमुख हैं।
कौथिग के दौरान उत्तराखण्ड सहित विभिन्न प्रदेशों से आए सांस्कृतिक दल मंच के माध्यम से अपनी प्रस्तुतियां देंगे। छोलिया नृत्य, नन्दा राजजात यात्रा की झलक, पारंपरिक झोड़े, छपेली गीत और नृत्य दर्शकों को उत्तराखण्ड की लोक-परंपराओं से रूबरू कराएंगे। इस बार विशेष आकर्षण के रूप में देवभूमि गैलरी का निर्माण किया गया है, जहां उत्तराखण्ड के देवी-देवताओं को समर्पित प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।
आयोजन को सफल बनाने के लिए मुख्य संयोजक टी.एस. मनराल, संयोजक के.एन. चन्दोला, अध्यक्ष गणेश चन्द्र जोशी, महासचिव महेन्द्र सिंह रावत, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट मोना सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। पूरी टीम का प्रयास है कि उत्तरायणी कौथिग-2026 राजधानी लखनऊ में उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई दे और आने वाली पीढ़ियों के लिए यादगार बन सके।