
बाराबंकी। आज जब देश में हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफरत और वैमनस्य की खाई गहराती जा रही है, तब फोरेवर हेल्प संस्था के अध्यक्ष लियाकत खान वारसी ने आपसी भाईचारे और कौमी एकता का संदेश देने के लिए एक अनोखी पहल की है। उन्होंने 13000 किलोमीटर लंबी वंदे भारत सद्भावना यात्रा निकालकर देशभर में अमन और एकता का पैगाम फैलाया। यह यात्रा सोमवार को बाराबंकी के प्रसिद्ध देवा शरीफ दरगाह पहुँची, जहाँ हज़रत अल्हाज़ आलमपनाह वारिस अली पाक शाह रहमतुल्लाह अलैह की मजार पर उन्होंने चादर शरीफ पेश की और देश में शांति, सद्भावना और भाईचारे की दुआएं मांगीं।
लियाकत खान वारसी ने कहा कि “हमारे देश की असली ताकत इसकी गंगा-जमुनी तहजीब और धार्मिक एकता में है। आज जरूरत है कि नफरत की राजनीति छोड़कर लोग एक-दूसरे के धर्म और संस्कृति का सम्मान करें।” उन्होंने कहा कि वारिस अली शाह जैसे सूफी संतों की शिक्षा आज भी हमें प्रेम, करुणा और इंसानियत का संदेश देती है।
देवा शरीफ पहुँचने पर लियाकत खान वारसी का जोरदार स्वागत किया गया। डीजीपी कार्यालय में तैनात एजाज खान ने उन्हें पारंपरिक दस्तार पहनाकर सम्मानित किया, वहीं सैयद मोहम्मद गुलजार वारसी ने उनका इस्तक़बाल करते हुए उनसे विशेष भेंट की। इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने भी वारसी की इस यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान देश में आपसी सौहार्द और एकता की मिसाल है।
लियाकत खान वारसी अपनी वंदे भारत सद्भावना यात्रा के तहत अब तक देश के कई राज्यों का दौरा कर चुके हैं। वे अपने दोपहिया वाहन पर निकलकर देश के कोने-कोने में पहुँच रहे हैं। यात्रा के दौरान वे स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के योगदान को भी याद कर रहे हैं और लोगों को यह संदेश दे रहे हैं कि भारत की असली पहचान प्रेम, त्याग और एकता में बसती है।
उनकी यह यात्रा न केवल धार्मिक सौहार्द का प्रतीक है, बल्कि देश में फैली सामाजिक दूरियों को मिटाने का एक प्रयास भी है। लियाकत खान वारसी का कहना है कि “जब तक हर व्यक्ति के दिल में इंसानियत जिंदा रहेगी, तब तक भारत की एकता को कोई नहीं तोड़ सकता।”
इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि सच्चे इरादे और नेक सोच से चलाया गया कोई भी अभियान समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। देवा शरीफ में उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि सूफी परंपरा आज भी देश की आत्मा में रची-बसी है, और इसी से भारत की पहचान कायम है।