
सूरतगंज/बाराबंकी। विपणन अधिकारी से हुई अभद्रता और धान खरीद में अनियमितताओं को लेकर बरैय्या धान क्रय केंद्र पर उपजा विवाद शुक्रवार की शाम तक भी समाप्त नहीं हो सका। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट व अराजनैतिक गुट) के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का धरना लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा, जिससे धान खरीद पूरी तरह प्रभावित रही। किसानों की मांग है कि जब तक मौके पर रामनगर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नहीं पहुंचते, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
धान क्रय केंद्र बरैय्या पर बीते एक सप्ताह से चल रहे धरने के दौरान दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि केंद्र पर मजदूरों और बिचौलियों का बोलबाला है। तीन क्रय केंद्र संचालित होने के बावजूद किसानों का धान समय से नहीं तौला जा रहा, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं केंद्र प्रभारियों का आरोप है कि सामान्य किसानों की अपेक्षा यूनियन से जुड़े कार्यकर्ताओं को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे विवाद की स्थिति बनी हुई है।
गुरुवार को टिकैत गुट के कार्यकर्ता लवकुश का खराब धान तौले जाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान कुछ अराजक तत्वों ने केंद्र प्रभारी प्रतीक प्रताप सिंह और अनिल यादव के साथ अभद्रता करते हुए हाथापाई का प्रयास किया। घटना के बाद केंद्र प्रभारी और भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने कोतवाली में अलग-अलग प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। नायब तहसीलदार द्वारा मौके पर पहुंचकर जांच की गई और उपस्थित किसानों के बयान दर्ज किए गए।
शुक्रवार को बरैय्या धान क्रय केंद्र पर भाकियू टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष हौसला प्रसाद के नेतृत्व में दर्जनों किसान पहुंचे और धरने पर बैठ गए। किसानों ने खरीद प्रक्रिया में अनियमितता, चौकीदारों और ठेकेदारों की मनमानी, तथा किसानों के शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए। मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार अभिनव सिंह ने किसानों से वार्ता कर धरना समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन किसान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की मौके पर उपस्थिति की मांग पर अड़े रहे।
देर शाम तक भी धरना समाप्त नहीं हो सका, जिससे धान खरीद पूरी तरह ठप रही। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गुंजिता अग्रवाल ने बताया कि मामले को लेकर संबंधित पदाधिकारियों और उच्चाधिकारियों से बातचीत की जा रही है और शीघ्र ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचकर धान खरीद शुरू कराई जाएगी।
फिलहाल स्थिति यथावत बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि किसान यूनियन की शर्तों पर धान खरीद शुरू होती है या धरना और लंबा खिंचता है।