केशीघाट स्टीमर हादसा: यमुना में डूबा स्टीमर, 10 की मौत, कई लापता

वृन्दावन। तीर्थनगरी वृन्दावन के केशीघाट पर गुरुवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया, जब यमुना नदी में एक स्टीमर पौंटून पुल से टकराकर पलट गया और डूब गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सेना, पीएसी और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। गोताखोर लगातार नदी में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। पुलिस के अनुसार अब तक 10 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें 7 महिलाएं और 3 पुरुष शामिल हैं। मृतकों में पिता-पुत्री और पति-पत्नी भी शामिल बताए जा रहे हैं।


डीआईजी शैलेश पांडेय ने जानकारी दी कि हादसे में 12 लोग घायल हुए हैं, जबकि कुछ अन्य अभी भी लापता हैं। घायलों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। राहत कार्य के लिए गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्टीमर में क्षमता से अधिक सवारियां थीं और वह तेज गति से चल रहा था। इसी दौरान तेज हवा के कारण नदी की बीच धारा में संतुलन बिगड़ गया और स्टीमर पौंटून पुल से टकरा गया। टक्कर के बाद स्टीमर पलट गया और देखते ही देखते यमुना में समा गया। हादसा करीब दोपहर तीन बजे हुआ।


पर्यटक मनोहर लाल के अनुसार स्टीमर में सवार लोग पंजाब के लुधियाना, हरियाणा के हिसार और उत्तराखंड के मुक्तेश्वर से घूमने आए थे। हादसे के बाद स्टीमर चालक मौके से फरार हो गया है, जिसकी तलाश की जा रही है।
हादसे ने वृन्दावन में पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि स्टीमर में 25 से 27 लोग सवार थे, जबकि उसकी क्षमता केवल 15 यात्रियों की थी। इतना ही नहीं, किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं कराई गई थी और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
यमुना किनारे नाव और स्टीमर संचालन में बढ़ती अव्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण की कमी इस हादसे की बड़ी वजह मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना पर्याप्त निगरानी के बड़ी संख्या में निजी स्टीमर संचालित हो रहे हैं, जो यात्रियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।