एनबीआरआई में दो दिवसीय ग्रीष्मकालीन पादप विज्ञान महोत्सव का समापन, शुभांशु शुक्ला बोले—आसमान से आगे विज्ञान की कोई सीमा नहीं

लखनऊ, 16 अप्रैल 2026। सीएसआईआर–राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय ग्रीष्मकालीन पादप विज्ञान महोत्सव (एसपीएसएफ) का गुरुवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि अशोक चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन एवं भारतीय वायु सेना के अधिकारी शुभांशु शुक्ला रहे।समारोह के दौरान संस्थान के शोधार्थियों ने महोत्सव की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस विज्ञान महोत्सव में डिजिटल फोटोग्राफी, मौखिक व्याख्यान और पोस्टर प्रस्तुति जैसी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें करीब 200 शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।इससे पहले संस्थान के निदेशक डॉ. अजित कुमार शासनी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शोधार्थी किसी भी अनुसंधान संस्थान की रीढ़ होते हैं और उनके शोध कार्य देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं को नवाचार और परिवर्तनकारी अनुसंधान के लिए प्रेरित किया।मुख्य अतिथि शुभांशु शुक्ला ने विजेताओं को पुरस्कृत करते हुए अपने संबोधन में अंतरिक्ष से पृथ्वी के अद्भुत सौंदर्य का उल्लेख किया और कहा कि हमें अपने ग्रह के महत्व को समझना चाहिए। उन्होंने विज्ञान और अनुसंधान को मानव समाज की समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर जोर देते हुए माइक्रोग्रेविटी में हो रहे प्रयोगों की जानकारी साझा की।उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की अपनी यात्रा के अनुभव बताते हुए सूक्ष्म शैवालों पर किए गए प्रयोगों और अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी के प्रभावों पर प्रकाश डाला। युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान को रोचक बनाना समय की जरूरत है, जिससे नई पीढ़ी की इसमें रुचि बढ़े।उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सपनों को भी उतनी ही ऊंचाई देनी होगी और अपने प्रसिद्ध संदेश को दोहराया—“आसमान की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए, न मेरे लिए, न तुम्हारे लिए और न ही भारत के लिए।”इससे पूर्व प्रातःकाल में संस्थान के वनस्पति उद्यान स्थित सेंट्रल लॉन में शोधार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए ध्यान सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का संचालन लखनऊ के कम्प्लीट क्योर हीलिंग एंड मेडिटेशन इंस्टीट्यूट के रजनीश मिश्रा ने किया, जिसमें प्रतिभागियों को माइंडफुलनेस और ध्यान की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास कराया गया।