‘गाजा का बदला…’, Flydubai के ओमानी को-पायलट ने पूछताछ में क्या बताया? विमान क्रैश की साजिश का खुलासा

Flydubai FZ1073 में कॉकपिट हमला मामले की जांच में नया दावा सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने पूछताछ में गाजा का बदला लेने और शहीद होने की इच्छा की बात कही है।

Flydubai फ्लाइट में कॉकपिट हमले के बाद ओमानी को-पायलट की भूमिका की जांच जारी है।
Flydubai फ्लाइट में कॉकपिट हमले के बाद ओमानी को-पायलट की भूमिका की जांच जारी है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। Flydubai की दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में हुए कॉकपिट हमले की जांच अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। रिपोर्टों के मुताबिक विमान के ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर कहा कि उसने यह हमला गाजा का बदला लेने के लिए किया था और वह मरकर ‘शहीद’ होना चाहता था। यह जानकारी फिलहाल जांच से जुड़े मीडिया सूत्रों के हवाले से सामने आई है और इसे अदालत में सिद्ध तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

कॉकपिट में हमला और विमान का तेजी से नीचे आना

30 सितंबर 2026 को Flydubai की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कॉकपिट में हमला कर दिया। UAE के अधिकारियों ने इस घटना को आतंकवादी हमला बताया है। जांच के अनुसार हमलावर ने कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया और विमान का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की।

फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार विमान अचानक हजारों फीट नीचे चला गया। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब कैप्टन मच्छार घायल हो गए और विमान का नियंत्रण खतरे में पड़ गया। हालांकि घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की। इसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू किया और विमान में मौजूद रिजर्व पायलट ने नियंत्रण संभाल लिया। विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।

‘गाजा का बदला’ बताने का दावा कितना महत्वपूर्ण?

इजरायली मीडिया रिपोर्टों (Flydubai ) के मुताबिक पूछताछ में अल-हमामी ने कथित तौर पर अपने हमले की वजह गाजा से जोड़ी। रिपोर्ट में उसके हवाले से कहा गया कि वह गाजा का बदला लेना चाहता था और शहीद होना चाहता था। अब जांच एजेंसियां उसके मोबाइल फोन, विदेश यात्राओं, संपर्कों और संभावित नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

सबसे अहम सवाल यह है कि क्या वह अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई संगठन या नेटवर्क था। इजरायली सुरक्षा एजेंसियां इस संभावना की भी जांच कर रही हैं कि विदेश यात्राओं के दौरान किसी व्यक्ति या संगठन ने उसे प्रभावित, भर्ती या सक्रिय किया था। फिलहाल उसके किसी आतंकी संगठन से सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

पहले से सुरक्षा संबंधी संकेतों ने बढ़ाई चिंता

इस मामले ने विमानन सुरक्षा व्यवस्था (Flydubai ) पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार अल-हमामी को ओमान में पहले उड़ान भरने से रोका गया था और उसके कथित चरमपंथी विचारों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं थीं। इसके बावजूद वह बाद में Flydubai में सह-पायलट के तौर पर काम करने लगा। यही कारण है कि अब जांच केवल 30 सितंबर की घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी पूरी पृष्ठभूमि की पड़ताल की जा रही है।

जांच का दायरा न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच चुका है। न्यूजीलैंड पुलिस ने पुष्टि की है कि अल-हमामी ने 2018-19 के दौरान वहां अपने फ्लाइट ट्रेनिंग का एक हिस्सा पूरा किया था। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी भी उसके संभावित संपर्कों की जांच कर रहे हैं।

कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका बनी निर्णायक

इस पूरी घटना में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार (Flydubai ) की भूमिका सबसे अहम रही। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिससे यात्रियों और क्रू को स्थिति समझने और हमलावर को काबू करने का मौका मिला। इसके बाद रिजर्व पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की।

अब जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल हैं—क्या हमले की पहले से योजना बनाई गई थी? क्या आरोपी ने पहले भी ऐसा करने की कोशिश की थी? क्या कोई आतंकी संगठन उससे जुड़ा था? और सबसे अहम, सुरक्षा संबंधी पुराने संकेतों के बावजूद वह इजरायल जाने वाली फ्लाइट के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। लेकिन इतना साफ है कि Flydubai की यह घटना वैश्विक विमानन सुरक्षा और पायलटों की बैकग्राउंड स्क्रीनिंग के लिए बड़ा चेतावनी संकेत बन चुकी है।

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