Chirag Paswan की LJP रामविलास ने यूपी की 403 विधानसभा सीटों पर संगठन और चुनावी तैयारी का ऐलान किया है। जानिए पूरी रणनीति।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री Chirag Paswan ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पार्टी के विस्तार की तैयारी तेज कर दी है। एलजेपी (रामविलास) ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सभी 403 सीटों पर संगठन और चुनावी तैयारी करने का ऐलान किया है। चिराग पासवान के इस कदम को सिर्फ चुनावी विस्तार नहीं, बल्कि बिहार से बाहर पार्टी की राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
403 सीटों पर संगठन खड़ा करने की तैयार
Chirag Paswan की पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की बात कही है। जुलाई में लखनऊ में पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान भी सभी 403 सीटों पर संगठन खड़ा करने की तैयारी की जानकारी सामने आई थी। सितंबर में प्रयागराज में आयोजित ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम के दौरान भी यूपी के चुनावी मैदान में उतरने की पार्टी की रणनीति स्पष्ट हुई।
हालांकि सभी 403 सीटों पर संगठनात्मक तैयारी का मतलब यह जरूरी नहीं है कि पार्टी हर सीट पर अंतिम रूप से अकेले उम्मीदवार उतारेगी। गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर चुनाव के करीब और राजनीतिक बातचीत के बाद साफ होगी।
NDA में रहते हुए अलग पहचान का संदेश
Chirag Paswan लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा जाहिर करते रहे हैं। लेकिन हाल के बयानों में वह गठबंधन के भीतर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान पर जोर देते नजर आए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि गठबंधन का हिस्सा होने का मतलब बीजेपी होना नहीं है और जरूरत पड़ने पर वह अपनी सरकार के खिलाफ भी आवाज उठा सकते हैं।
बिहार में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर चिराग ने अपनी ही गठबंधन सरकार पर सवाल उठाए। सितंबर में उन्होंने अपराध और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसी सरकार का हिस्सा होने पर उन्हें शर्म आती है।
यूपी में युवाओं पर भी फोकस
Chirag Paswan की यूपी रणनीति में युवाओं को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। प्रयागराज में ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम में उन्होंने रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर बात की। उन्होंने राष्ट्रीय युवा आयोग बनाने की मांग भी उठाई।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकारी लापरवाही या पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द होती है तो अगली परीक्षा में छात्रों के यात्रा, ठहरने और भोजन का खर्च संबंधित विभाग को उठाना चाहिए। साथ ही रद्द हुई परीक्षा का प्रयास छात्रों के रिकॉर्ड में नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
बिहार से बाहर विस्तार की कोशिश
Chirag Paswan के लिए उत्तर प्रदेश का चुनाव सिर्फ विधानसभा सीटों का सवाल नहीं है। बिहार में उनकी पार्टी के पास 19 विधायक हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव में एलजेपी (रामविलास) ने अपनी लड़ी हुई पांचों सीटों पर जीत दर्ज की थी। इससे चिराग की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति मजबूत हुई।
अब उत्तर प्रदेश में विस्तार के जरिए वह यह संदेश देना चाहते हैं कि एलजेपी (रामविलास) सिर्फ बिहार तक सीमित पार्टी नहीं है। यूपी में संगठन खड़ा करना उनके लिए लंबी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
दलित और युवा वोट पर नजर
उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति का समीकरण बिहार से अलग है। ऐसे में Chirag Paswan के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय सामाजिक समीकरणों को समझकर संगठन मजबूत करने की होगी। पार्टी के लिए दलित समाज के साथ-साथ युवाओं को जोड़ना भी अहम माना जा रहा है।
हालांकि चुनावी राजनीति में किसी पार्टी के वोट प्रभाव का वास्तविक आकलन चुनाव के दौरान उम्मीदवारों, गठबंधनों और स्थानीय मुद्दों के आधार पर ही किया जा सकता है। फिलहाल चिराग पासवान का 403 सीटों पर संगठन विस्तार का दावा यूपी की सियासत में एक नई राजनीतिक संभावना जरूर पैदा कर रहा है।
क्या बदलेगा यूपी का सियासी समीकरण?
उत्तर प्रदेश में एलजेपी (रामविलास) की सक्रियता का असर सबसे ज्यादा गठबंधन की राजनीति पर देखने को मिल सकता है। अगर पार्टी NDA के साथ सीटों के समझौते में जाती है तो उसे कितनी सीटें मिलती हैं, यह महत्वपूर्ण होगा। वहीं अगर पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ती है तो उसका प्रदर्शन और वोट प्रतिशत उसकी भविष्य की राजनीतिक स्थिति तय करेगा।
इसलिए Chirag Paswan का यूपी मिशन फिलहाल सिर्फ 403 सीटों की घोषणा नहीं है। यह बिहार से बाहर राजनीतिक विस्तार, युवाओं के बीच पकड़ और NDA के भीतर अपनी स्वतंत्र पहचान मजबूत करने की कोशिश भी है। 2027 के विधानसभा चुनाव तक यह रणनीति किस रूप में बदलती है, इस पर पूरे राजनीतिक गलियारे की नजर रहेगी।
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