Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact यमन में हूतियों के खिलाफ जंग तेज हो गई है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने रक्षा समझौता सक्रिय किया है। जानिए पूरे घटनाक्रम की वजह।

डिजिटल डेस्क, रियाद। Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने अपने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को सक्रिय करते हुए सऊदी अरब में सैन्य बलों और आवश्यक क्षमताओं की तेजी से तैनाती पर सहमति जताई है। रियाद में हुई आपात बैठक के बाद तीनों देशों ने कहा कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाएगा।
मदीना के पावर स्टेशन पर हमले से बढ़ा तनाव
क्षेत्र में तनाव बढ़ने की बड़ी वजह मदीना में उस बिजली वितरण केंद्र पर हुआ ड्रोन हमला है, जो पैगंबर की मस्जिद यानी मस्जिद-ए-नबवी को बिजली की आपूर्ति करता है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस हमले के लिए हूतियों को जिम्मेदार ठहराया है। गठबंधन के मुताबिक, हमले में एक ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुआ, लेकिन बिजली की पूरी व्यवस्था बाधित नहीं हुई। हूतियों ने इस आरोप को खारिज किया है।
सऊदी अरब ने इससे पहले मक्का को निशाना बनाने की कोशिश का भी हूतियों पर आरोप लगाया था। हूती पक्ष (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) ने इन आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में पवित्र शहरों को लेकर सामने आए दावों की स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक जांच और स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
मक्का संयुक्त रक्षा समझौता हुआ सक्रिय
रियाद में हुई आपात बैठक के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) ने रक्षा समझौते के तहत अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से तैनात करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत सदस्य देशों ने सऊदी अरब में आवश्यक सैन्य बल और क्षमताएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इसका उद्देश्य साझा रक्षा क्षमता, सैन्य समन्वय और संभावित खतरों के खिलाफ सामूहिक रोकथाम को मजबूत करना है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान ने सऊदी अरब की रक्षा में मदद की प्रतिबद्धता तो जताई है, लेकिन उसके सैनिकों की किसी विशेष संख्या या सीधे हवाई हमलों में भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
‘डॉन ऑफ यमन’ ऑपरेशन से जंग तेज
इसी बीच सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है। इसे ‘ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन’ कहा जा रहा है। अभियान का उद्देश्य हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना और रणनीतिक क्षेत्रों पर सरकारी नियंत्रण बहाल करना बताया गया है।
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) के अनुसार, अभियान में करीब 100 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया और 324 हाई-वैल्यू लक्ष्यों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। गठबंधन ने यह भी कहा कि वह यमनी सरकारी बलों को लगातार हवाई सहायता दे रहा है।
बाब अल-मंदेब पर कब्जे की लड़ाई
इस संघर्ष का असर सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है। रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी लड़ाई तेज हो गई है। सऊदी समर्थित यमनी (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) बलों ने मोखा और आसपास के इलाकों में हूतियों के खिलाफ अभियान तेज किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, यमनी सरकारी बलों ने मोखा पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने का दावा किया है।
बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
हूतियों का सऊदी ठिकानों पर पलटवार
सऊदी नेतृत्व वाले हमलों के बीच हूतियों (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) ने भी सऊदी अरब के कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। इनमें रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, तेल प्रतिष्ठान और सैन्य ठिकाने शामिल बताए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में उपलब्ध नहीं है।
इस तरह यमन का संघर्ष अब एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन गया है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के रक्षा सहयोग और यमन में बड़े सैन्य अभियान से आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। खासकर लाल सागर और बाब अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर पूरे क्षेत्र के साथ वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।डिजिटल डेस्क, रियाद। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है।
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने अपने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को सक्रिय करते हुए सऊदी अरब में सैन्य बलों और आवश्यक क्षमताओं की तेजी से तैनाती पर सहमति जताई है। रियाद में हुई आपात बैठक के बाद तीनों देशों ने कहा कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाएगा।
मदीना के पावर स्टेशन पर हमले से बढ़ा तनाव
क्षेत्र में तनाव बढ़ने की बड़ी वजह मदीना में उस बिजली वितरण केंद्र पर हुआ ड्रोन हमला है, जो पैगंबर की मस्जिद यानी मस्जिद-ए-नबवी को बिजली की आपूर्ति करता है। सऊदी (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस हमले के लिए हूतियों को जिम्मेदार ठहराया है। गठबंधन के मुताबिक, हमले में एक ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुआ, लेकिन बिजली की पूरी व्यवस्था बाधित नहीं हुई। हूतियों ने इस आरोप को खारिज किया है।
सऊदी अरब ने इससे पहले मक्का को निशाना बनाने की कोशिश का भी हूतियों पर आरोप लगाया था। हूती पक्ष ने इन आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में पवित्र शहरों को लेकर सामने आए दावों की स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक जांच और स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
मक्का संयुक्त रक्षा समझौता हुआ सक्रिय
रियाद में हुई आपात बैठक के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) ने रक्षा समझौते के तहत अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से तैनात करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत सदस्य देशों ने सऊदी अरब में आवश्यक सैन्य बल और क्षमताएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई है। इसका उद्देश्य साझा रक्षा क्षमता, सैन्य समन्वय और संभावित खतरों के खिलाफ सामूहिक रोकथाम को मजबूत करना है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान ने सऊदी अरब की रक्षा में मदद की प्रतिबद्धता तो जताई है, लेकिन उसके सैनिकों की किसी विशेष संख्या या सीधे हवाई हमलों में भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
‘डॉन ऑफ यमन’ ऑपरेशन से जंग तेज
इसी बीच सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने हूतियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है। इसे ‘ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन’ कहा जा रहा है। अभियान का उद्देश्य हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना और रणनीतिक क्षेत्रों पर सरकारी नियंत्रण बहाल करना बताया गया है।
सऊदी नेतृत्व वाले (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की के अनुसार, अभियान में करीब 100 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया और 324 हाई-वैल्यू लक्ष्यों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। गठबंधन ने यह भी कहा कि वह यमनी सरकारी बलों को लगातार हवाई सहायता दे रहा है।
बाब अल-मंदेब पर कब्जे की लड़ाई
इस संघर्ष का असर सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है। रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी लड़ाई तेज हो गई है। सऊदी समर्थित यमनी बलों ने मोखा और आसपास के इलाकों में हूतियों के खिलाफ अभियान तेज किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, यमनी (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) सरकारी बलों ने मोखा पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने का दावा किया है।
बाब अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
हूतियों का सऊदी ठिकानों पर पलटवार
सऊदी नेतृत्व वाले हमलों के बीच हूतियों (Saudi Pakistan Turkiye Defense Pact) ने भी सऊदी अरब के कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। इनमें रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, तेल प्रतिष्ठान और सैन्य ठिकाने शामिल बताए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में उपलब्ध नहीं है।
इस तरह यमन का संघर्ष अब एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन गया है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के रक्षा सहयोग और यमन में बड़े सैन्य अभियान से आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। खासकर लाल सागर और बाब अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर पूरे क्षेत्र के साथ वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
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