CJP: 13 अक्टूबर 2026 को दो अलग-अलग प्राथमिकी यानी FIR दर्ज, तिहाड़ भेजे गए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्यों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद मामला गरमा गया है। जंतर-मंतर परिसर में तिरंगा फहराने और वंदे मातरम के नारे लगाने के मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।
वहीं, CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये के बॉन्ड और छह महीने तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया है।
जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद पुलिस की कार्रवाई
मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के 14 सदस्य एक निजी परिसर से होकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। वहां उन्होंने तिरंगा फहराया और वंदे मातरम के नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने सभी 14 सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर को हाल ही में प्रदर्शन स्थल की सूची से डीनोटिफाई किया गया है। पुलिस ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उसके काम में बाधा उत्पन्न की गई। इसी आधार पर मामले में कानूनी कार्रवाई की गई।
इस घटना के बाद पार्टी के सदस्यों की हिरासत और न्यायिक कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ गया है।

CJP के मामले में दो FIR दर्ज, कई धाराओं में कार्रवाई
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस मामले में 13 अक्टूबर 2026 को दो अलग-अलग प्राथमिकी यानी FIR दर्ज की गईं।
पहली FIR नंबर 289/26 कनॉट प्लेस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223(a), 332 और 61(2) के तहत दर्ज की गई। दूसरी FIR नंबर 128/26 संसद मार्ग थाने में BNS की धारा 221, 115(2), 132, 121(1) और 3(5) के तहत दर्ज हुई।
पुलिस ने बताया कि सभी 14 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उसके मुताबिक, बार-बार कानून का उल्लंघन करने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की गई।
पुलिस का यह भी आरोप है कि ये सदस्य सोशल मीडिया के जरिए दूसरे लोगों को भी इस तरह की गतिविधियों के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे थे। बुधवार को तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया।
अजिंक्य शिंदे 5,000 रुपये के बॉन्ड पर रिहा
कार्रवाई के बाद अजिंक्य शिंदे को 5,000 रुपये का बॉन्ड भरवाकर रिहा कर दिया गया। रिहाई के साथ छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की शर्त लगाई गई है।
वहीं, पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को रिपीट ऑफेंडर यानी बार-बार अपराध करने वाला बताया। दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद तिहाड़ जेल में रखा गया है।
पुलिस की कार्रवाई को लेकर CJP के सदस्यों और पार्टी नेतृत्व ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस के आरोपों और पार्टी की आपत्तियों के अलावा मामले पर किसी न्यायिक निष्कर्ष का विवरण नहीं दिया गया है।
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने पुलिस पर लगाए आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस पर अदालत में झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पुलिस ने कोर्ट में कहा कि जंतर-मंतर पर दूसरे प्रदर्शनकारियों को बुलाया गया था। रत्ना सिंह ने पुलिस के इस दावे को खारिज किया है।
संस्थापक अभिजीत दीपके ने हिरासत पर उठाए सवाल
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल भेजे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि दोनों का अपराध क्या था।
दीपके ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आशु और सौरव को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनकी गलती – जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना।”
इस बयान के जरिए उन्होंने दोनों सदस्यों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर आपत्ति जताई। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने कानून के उल्लंघन और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका को कार्रवाई का आधार बताया है।

CJP सदस्यों पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद
जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद CJP के सदस्यों के खिलाफ दर्ज दोनों FIR और तीन सदस्यों पर की गई एहतियाती कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है। एक सदस्य को बॉन्ड पर रिहा किया गया है, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
मामले में पुलिस के आरोपों और CJP के नेताओं की आपत्तियों के बीच दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यही स्पष्ट है कि पुलिस ने कानूनी कार्रवाई की है और पार्टी नेतृत्व ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। (Expose India)
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