यासीन मलिक समेत 7 आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय करने का आदेश

8.95 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय का मामला

यासीन मलिक मनी लॉन्ड्रिंग केस में अदालत का आदेश
यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश।

डिजिटल डेस्क, अमर भारती। दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि हवाला नेटवर्क के जरिए विदेशी फंडिंग हासिल की गई और इससे करीब 8.95 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय अर्जित हुई। यह मामला 2017 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज केस से जुड़ा है।

यासीन मलिक समेत सात आरोपियों पर क्या हैं आरोप?

विशेष अदालत ने 1 अक्टूबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। इनमें यासीन मलिक के अलावा जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल रशीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और मसरत आलम भट शामिल हैं।

ED के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर हवाला चैनलों और अन्य माध्यमों से विदेशी फंड हासिल किए। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों और उनके एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया गया।

अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों पर विचार करने के बाद आरोप तय करने का निर्देश दिया। हालांकि, आरोप तय होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।

8.95 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय का मामला

ED की जांच के अनुसार, इस मामले में अपराध से कथित तौर पर 8,94,87,639 रुपये की आय अर्जित हुई। एजेंसी का आरोप है कि यह रकम अलग-अलग माध्यमों से आरोपियों तक पहुंची।

अदालत के आदेश में NIA की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट का भी उल्लेख किया गया। इसके मुताबिक, यासीन मलिक को सऊदी अरब से 15,75,595 रुपये मिले थे। रिकॉर्ड में उनके द्वारा कथित तौर पर प्राप्त कुल विदेशी फंड की राशि 30,75,595 रुपये बताई गई है।

ED का मामला 2017 में NIA द्वारा दर्ज केस पर आधारित है। उस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 121 और 121A तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

हवाला नेटवर्क और विदेशी फंडिंग को लेकर ED का दावा

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि यासीन मलिक ने 2015-16 के दौरान जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह और मसरत आलम के माध्यम से विदेशी फंड हासिल किए थे। एजेंसी के मुताबिक, मलिक से जुड़े ईमेल से विदेशों से धन जुटाने के लिए नेटवर्क बनाए जाने की जानकारी मिली।

ED का दावा है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए किया गया। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि नकदी कूरियर के जरिए भेजी जाती थी। इन कूरियरों के पाकिस्तान हाई कमीशन, नई दिल्ली से धन लेने और उसे यासीन मलिक सहित हुर्रियत नेताओं तक पहुंचाने का आरोप है।

विशेष NIA जज प्रशांत शर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री के आधार पर सातों आरोपियों के खिलाफ PMLA की धारा 3 के तहत अपराध का आरोप लगाए जाने के लिए पर्याप्त आधार और प्रथम दृष्टया संदेह है। इस अपराध के लिए अधिनियम की धारा 4 में सजा का प्रावधान है।

कौन है यासीन मलिक?

यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर का अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का अध्यक्ष रह चुका है। यह संगठन 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर घाटी में सशस्त्र उग्रवाद से जुड़ा रहा था।

मई 2022 में NIA की विशेष अदालत ने यासीन मलिक को आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकवादी तथा अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उस पर जनवरी 1990 में श्रीनगर के रावलपोरा में भारतीय वायुसेना के चार जवानों की हत्या का आरोप भी है।

आगे की राह

यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश कथित विदेशी फंडिंग और हवाला नेटवर्क की जांच से जुड़ा है। ED ने करीब 8.95 करोड़ रुपये की कथित अवैध आय का उल्लेख किया है। मामले में आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय और दोष सिद्ध होने की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है। (Expose India)

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