
लखनऊ। राजधानी में निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ अब विरोध की आवाजें तेज होती जा रही हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय छात्र पंचायत के बैनर तले छात्रों ने हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा और जीपीओ पार्क पर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और शिक्षा के नाम पर हो रही कथित लूट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, हर साल महंगी किताबें बदलने की परंपरा और विभिन्न नामों से वसूले जा रहे अतिरिक्त शुल्कों पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि शिक्षा अब सेवा नहीं, बल्कि व्यवसाय बनती जा रही है, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
राष्ट्रीय छात्र पंचायत के अध्यक्ष शिवम पांडेय ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के नाम पर हो रही लूट किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी स्कूल मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं और अभिभावकों को मजबूरी में इसे स्वीकार करना पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि फीस नियंत्रण के लिए सख्त और प्रभावी कानून बनाए जाएं, ताकि स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जा सके। साथ ही हर साल बदलने वाली महंगी किताबों के सिंडिकेट को खत्म करने की भी मांग उठाई गई। छात्रों का कहना था कि किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों से अनावश्यक खर्च कराया जाता है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट फीस और अन्य छिपे हुए शुल्कों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इन अतिरिक्त शुल्कों के कारण अभिभावकों को वास्तविक फीस से कहीं ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।
छात्रों ने सरकार से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
लखनऊ में बढ़ते इस विरोध ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियंत्रण को लेकर अब केवल अभिभावक ही नहीं, बल्कि छात्र भी खुलकर सामने आ रहे हैं।