पहले ब्रिक्स और अब G 20, क्या ‘गिरफ्तारी के डर’ से भारत नहीं आ रहे हैं रुसी राष्ट्रपति पुतिन.

9-10 सितंबर को भारत में होने वाले जी-20 समिट में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल नहीं हो रहे है, इससे पहले भी साउथ अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुए ब्रिक्स समिट में भी वे शामिल नहीं हुए थे. रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन ने भी अपने राष्ट्रपति पुतिन के भारत में जी-20 समिट में न आने का कारण बताते हुए कहा, वह बहुत व्यस्त हैं और उनका फोकस युक्रेन में चल रहे विशेष सैन्य अभियान में चल रहा है.

पहले ब्रिक्स और अब G 20, क्या 'गिरफ्तारी के डर' से भारत नहीं आ रहे हैं रुसी राष्ट्रपति पुतिन.


अब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भारत का दौरा कर, जी-20 में शामिल होंगे. लेकिन इन सब कारणों के पीछे राष्ट्रपति पुतिन का डर बताया जा रहा है. आपको बता दें कि इंटरनेशनल क्राइम कोर्ट ने पुतिन के खिलाफ 17 मार्च को अरेस्ट वारंट जारी किया था. उनका अरेस्ट वारंट ‘वार क्राइम’ के तहत जारी हुआ है.


हालाकि भारत इंटरनेशनल क्राइम कोर्ट(आईसीसी) का सदस्य नहीं है, लेकिन अंतराष्ट्रीय कानून के आर्टिकल 87(5) के तहत आईसीसी गैरसदस्यों से अपील कर सकता है की उनकी मदद करें. लेकिन यह गैरसदस्य देशो पर निर्भर करता है कि वो इंटरनेशनल क्राइम कोर्ट की मदद करें या नहीं.


साउथ अफ्रीका इंटरनेशनल क्राइम कोर्ट का सदस्य है, अगर पुतिन ब्रिक्स की समिट में शामिल होने जाते तो साउथ अफ्रीका को इंटरनेशनल क्राइम कोर्ट का सदस्य होने के नाते, रूस के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने का फर्ज था. लेकिन साउथ अफ्रीका का इतिहास देखें तो साल 2017 में सूडान के प्रमुख अल-बशीर ने साउथ अफ्रीका की यात्रा की थी. तब साउथ अफ्रीका ने न तो उसे गिरफ्तार किया और न ही सरेंडर करने के लिए मजबूर किया. यह तो समय ही बताएगा कि क्या पुतिन डर के मारे विदेश का दौरा नहीं कर रहे है.