
नई दिल्ली: केरल के मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर अबतक कयास ही लगाए जा रहे थे लेकिन चुनाव परिणामों के 10 दिन बाद ही सही आखिरकार वो नाम सामने आ ही गया जिसको लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता काफी उत्साहित नज़र आ रहे हैं. वदस्सेरी दामोदरन सतीशन यानी वीडी सतीशन अब केरल के नए मुख्यमंत्री होंगे.
पारिवारिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि?
सतीशन को एक शिक्षित परिवार से आते हैं. 31 मई 1964 में केरल के कोच्चि स्थित नेट्टूर में नायर परिवार में जन्में सतीशन के पिता का नाम के. दामोदरा मेनन और मां का नाम वी विलासिनी अम्मा है. वीडी सतीशन की प्रारंभिक शिक्षा पनांगड हाईस्कूल से हुई है। इसके बाद उन्होंने सैक्रेड हार्ट कॉलेज, थेवारा से स्नातक की पढ़ाई की। सतीशन ने राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज, कोच्चि से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री हासिल की। राजनीति में आने से पहले उन्होंने कानून की गहरी पढ़ाई की। केरल लॉ एकेडमी लॉ कॉलेज से एलएलबी की और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, तिरुवनंतपुरम से मास्टर ऑफ लॉ (एलएलएम) की डिग्री भी हासिल की और 10 वर्षों से ज्यादा समय तक केरल उच्च न्यायालय में वकालत के पेशे में रहे.
शुरूआती राजनीतिक सफर
वीडी सतीशन की राजनीतिक पृष्ठभूमि काफी मज़बूत रही है. स्टूडेंट लाइफ के समय ही उनका राजनीतिक सफर शुरू हो गया था. केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) से उन्होंने अपने राजनितिक जीवन में कदम रखा. वह एक मुखर नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाने लगे और 1986-1997 में वह महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष चुने गए. उनकी राजनीतिक समझ को लेकर उन्हें एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई जिसे उन्होंने बखूबी निभाया.
हार से शुरू हुआ सफ़र
उन्होंने अपना पहला चुनाव वर्ष 1996 में परावूर विधानसभा सीट से लड़ा. उस समय कम्युनिस्ट पार्टी का दबदबा हुआ करता था. यही वजह है उन्हें भाकपा के उम्मीदवार पी. राजू से हार मिली थी. वर्ष 2001 में परवूर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार केरल विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक बने. इसके बाद निवासन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वर्ष 2001 से लेकर अबतक निवासन कोई चुनाव नहीं हारे हैं. वह लगातार 6 बार 2001-2026 तक विधायक चुने गए। उन्होंने 2006 में केएम. दिनाकरन, 2011 में भाकपा के पन्नियन रवींद्रन और 2016 में शारदा मोहन जैसे कद्दावर वामपंथी नेताओं को बड़े अंतर से हराया। आज उनकी मेहनत का नतीज़ा सामने आया. . 12वीं विधानसभा के दौरान उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्य सचेतक (मुख्य व्हिप) के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के शासन के दौरान विकास के दावों पर कड़े सवाल उठाकर वामपंथी सरकार के खिलाफ खुद को विपक्ष की मुख्य आवाज के रूप में स्थापित किया।
वीडी निवासन का दावा सही साबित हुआ
अब वीडी निवासन केरल के मुख्यमंत्री के रूप में जाने जाएंगे. परवूर विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में वीडी निवासन का अजेय किला बन चुका है. 2026 के विधानसभा चुनावों में सतीशन ने पूरे अभियान की कमान संभाली और सार्वजनिक कसम खाई कि अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन को 140 में से 100 सीटें नहीं मिलतीं, तो वे राजनीति छोड़कर संन्यास ले लेंगे। उनका यह दावा सही साबित हुआ और यूडीएफ ने 102 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि सतीशन ने खुद परवूर से 20,600 वोटों के भारी अंतर से अपनी छठी जीत हासिल की। आज यूडीएफ की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और कार्यकर्ताओं के भारी समर्थन के साथ केरल के मुख्यमंत्री नामित हो गए हैं।
10 दिन क्यों लगे
4 मई 2026 को चुनाव नतीजे आने के बाद अंदर की खींचतान ने मुख्यमंत्री के चेहरे को केरल से दूर रखा. सीएम पद की रेस में तीन नाम सामने आ रहे थे जिनमें वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेस चेन्निथला के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला था. रमेश चेन्निथला का कहना था कि वरिष्ठता के आधार पर मुख्यमंत्री का पद उनको मिलना चाहिए जबकि सतीशन के खेमे का तर्क था पिछले पांच वर्षों तक विपक्ष के नेता के रूप में संघर्ष करने वाले और विषम परिस्थितियों में भी गठबंधन को जीत दिलाने वाले को भला कैसे इग्नोर किया जा सकता है. फिलहाल 10 दिन बाद ही सही मेहनत रंग लाई और अब उनके नाम का एलान किया चुका है और केरल के नए सीएम के तौर पर काबिज होंगे.