
बाराबंकी। इस्राइल और अमेरिका के हमलों के बीच ईरान में बाराबंकी जिले के 32 लोग फंसे हुए हैं, जिनमें आठ महिलाएं भी शामिल हैं। कोई दीनी तालीम के लिए गया है, कोई जियारत पर गया था, तो कोई वर्षों से वहीं रहकर बच्चों को पढ़ा रहा है। जिला प्रशासन ने फंसे लोगों की सूची तैयार कर ली है और अन्य लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि दूतावास के माध्यम से उनकी सूचना भेजी जा सके।
जैदपुर थाना क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों के 13 लोग ईरान में मौजूद हैं। युद्ध जैसे हालातों के बीच उनके परिजन लगातार उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। जैदपुर के मोहल्ला चिकना महल निवासी अली गदीर रिजवी का परिवार इन दिनों बेहद चिंतित है। उनके छोटे भाई मौलाना जौहर अब्बास करीब 20 वर्षों से ईरान के कुम शहर में धार्मिक शिक्षा से जुड़े हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह वहीं बच्चों को पढ़ा रहे हैं। तीन महीने पहले वे अपनी मां, पत्नी और दो बेटियों के साथ जियारत के लिए ईरान गए थे।
मोहल्ला चिकना महल के अरशद रजा खान के बेटे आबिद रजा, काशिफ रिजवी के बेटे फसी मोहम्मद और रईस कटरा के अरशद रजा समेत कई युवक वर्षों से वहां रहकर दीनी तालीम हासिल कर रहे हैं। वहीं शहर कोतवाली क्षेत्र के दुर्गापुरी और अस्करी हाल के भी 18 लोग ईरान में मौजूद बताए जा रहे हैं। कटरा मोहल्ले के अफरोज सैय्यद, कटरा इमामबाड़ा बरादरी की क्यूसा जहरा, दुर्गापुरी के मौलाना जफर अब्बास, अफरोज सैय्यद, अस्करी नगर के यासूब, मौलाना सैय्यद कासिफ रिजवी, दुरय जैनब, फातिमा रबाब, मोहम्मद रजा और मोहम्मद काजिम समेत कई लोग वहां फंसे हुए हैं।
परिजनों का कहना है कि ईरान में इंटरनेट सेवाएं बंद होने के कारण उनसे वीडियो कॉल पर संपर्क नहीं हो पा रहा है। कभी-कभार फोन कॉल के जरिए ही बात हो पाती है, जिससे चिंता और बढ़ गई है। जिला प्रशासन ने फंसे लोगों की सूची तैयार कर उनके परिजनों से संपर्क शुरू कर दिया है और सूची को दूतावास के माध्यम से आगे भेजा जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जा सके।
इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत की खबर के बाद कस्बा जैदपुर में मुस्लिम परिवारों ने इमामबाड़ों के साथ अपने घरों पर भी काले झंडे लगा दिए हैं। वहीं असंद्रा थाना क्षेत्र के आलमपुर गांव में शोकसभा आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस घटना को लेकर लोगों में अमेरिका के प्रति नाराजगी भी देखी जा रही है।