लखनऊ में नारद जयंती पर मीडिया-संवाद: समाज में भेदभाव समाप्त कर राष्ट्र निर्माण पर जोर

लखनऊ। राजधानी में नारद जयंती पर के खास मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि हिंदू समाज में जाति, भाषा, प्रांत जैसे आधारों पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि संघ व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के कार्य में निरंतर सक्रिय है और इसके लिए 32 से अधिक संगठन समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। वे गुरुवार को नारद जयंती के अवसर पर आयोजित एक मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

संघ की 100 वर्ष की यात्रा और उद्देश्य पर प्रकाश

सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा सामान्य नहीं रही है, बल्कि इसमें कार्यकर्ताओं ने अनेक उतार-चढ़ाव का सामना किया है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य विश्व स्तर पर “भारत माता की जय” का उद्घोष करना और भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाना है। प्रथम सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि संघ व्यक्ति-निष्ठ नहीं, बल्कि तत्व-निष्ठ संगठन है। यही कारण है कि संघ ने किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि भगवा ध्वज को गुरु के रूप में स्वीकार किया है।

देशभर में शाखाएं और सामाजिक गतिविधियां

नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में संघ की 85,000 से अधिक दैनिक शाखाएं और 32,000 से अधिक साप्ताहिक मिलन देशभर में संचालित हो रहे हैं। वनवासी क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक स्वयंसेवक विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और समाज के हर वर्ग तक पहुंच बना रहे हैं।

‘पंच परिवर्तन’ के जरिए समाज में बदलाव का लक्ष्य

संघ की भविष्य की कार्य योजना पर चर्चा करते हुए नरेंद्र ठाकुर ने ‘पंच परिवर्तन’ के लक्ष्य को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता के माध्यम से हिंदू समाज के बीच सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित हिंदू सम्मेलनों में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी इसका उदाहरण है।

आरएसएस के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने ‘कुटुंब प्रबोधन’ पर जोर देते हुए कहा कि यदि पारिवारिक व्यवस्था सुदृढ़ रहेगी तो समाज भी सशक्त होगा। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी समाज का प्रमुख कर्तव्य बताते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में ‘स्व’ की भावना चाहे वह भाषा हो या वेशभूषा महत्वपूर्ण होनी चाहिए। साथ ही नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और राष्ट्र तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए।

यूजीसी दिशा-निर्देशों पर टिप्पणी से परहेज

यूजीसी के दिशा-निर्देशों से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए संघ इस विषय पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं करना चाहता। हालांकि उन्होंने यह अवश्य कहा कि समाज में सद्भाव बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में अनेक प्रमुख लोगों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख एवं ‘राष्ट्रधर्म’ के निदेशक मनोजकांत, प्रांत प्रचारक कौशल, प्रांत संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह, विश्व संवाद केंद्र न्यास के उपाध्यक्ष अशोक सिन्हा, विशेष संपर्क प्रमुख प्रशांत भाटिया और मीडिया संवाद प्रमुख बृजनंदन राजू सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ पत्रकार और प्रमुख लोग नागरिक उपस्थित रहे।