
मथुरा:जनपद के गोवर्धन क्षेत्र स्थित अड़ींग ग्राम पंचायत में 39 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस ग्रांट में कथित घपले के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच दो स्तरों पर कराई जाएगी। एक ओर जिलाधिकारी ने जनपद स्तर पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है, वहीं दूसरी ओर लोकायुक्त के निर्देश पर कमिश्नर आगरा द्वारा गैर जनपद के तीन वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।जांच समिति गठित होने की जानकारी सार्वजनिक होते ही गांव में हलचल तेज हो गई। रविवार को पंचायत क्षेत्र में करीब 60 लाख रुपये की लागत से लगी सोलर स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइटों को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया। मौके पर पंचायत का एक सफाई कर्मचारी भी मरम्मत कार्य में लगा नजर आया, जिससे पूरे मामले पर सवाल और गहरा गए हैं।ग्राम पंचायत में अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग की शिकायतें लंबे समय से उच्च अधिकारियों तक पहुंच रही थीं। पहले भी स्थानीय स्तर पर कुछ शिकायतों का निस्तारण जल्दबाजी में अधूरे कार्य पूरे कराकर कर दिया गया था। हालांकि, पूर्व में एडीएम के निर्देशन में गठित जांच समिति की रिपोर्ट को शिकायतकर्ता ने गलत बताते हुए चुनौती दी थी। ग्रामीणों ने भी शपथपत्र देकर बताया कि करोड़ों रुपये से बने कई संपत्तियां पांच साल बाद भी उपयोग में नहीं हैं।लोकायुक्त ने सभी तथ्यों का संज्ञान लेते हुए 21 अप्रैल को कमिश्नर आगरा को निर्देशित किया कि मथुरा के बाहर के तीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसकी सूचना शिकायतकर्ता अजीत सैनी को 2 मई को प्राप्त हुई।इसी बीच 17 फरवरी को पंचायत के 12 सदस्यों द्वारा सामूहिक इस्तीफा देने के बाद स्थिति और जटिल हो गई थी। इस्तीफों का सत्यापन होने के बावजूद जिला पंचायत स्तर पर लंबित प्रक्रिया के कारण पंचायत में प्रशासक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। बोर्ड भंग होने से धन निकासी पर भी रोक लग गई थी, हालांकि जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद आवश्यक भुगतान जैसे वेतन और पेयजल आपूर्ति से जुड़े खर्चों को अनुमति दी गई।शिकायतकर्ता अजीत सैनी ने आरोप लगाया है कि सोलर हाईमास्ट और स्ट्रीट लाइटों में भारी अनियमितता हुई है और इन्हें पांच साल बाद पहली बार ठीक किया जा रहा है। उन्होंने कमिश्नर और लोकायुक्त को मेल भेजकर निष्पक्ष जांच टीम, सुरक्षा व्यवस्था और जांच की पूर्व सूचना देने की मांग भी की है।अब देखना होगा कि जिला पंचायत से इस्तीफों पर अवलोकन रिपोर्ट कार्यकाल समाप्ति (26 मई) से पहले आती है या बाद में, और जांच टीमें कब तक पूरे मामले में निष्कर्ष तक पहुंचती हैं।