गैस की किल्लत नहीं, फिर भी ब्लैक मार्केटिंग क्यों? किरावली में बढ़े दामों से हड़कंप

किरावली। अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच क्षेत्र में रसोई गैस को लेकर दोहरी स्थिति सामने आ रही है। एक ओर प्रशासन गैस, पेट्रोल और अन्य ईंधनों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बाजार में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की खुलेआम ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे आम उपभोक्ता और व्यवसायी दोनों परेशान हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडर जहां निर्धारित कीमत से अधिक लगभग 1500 रुपये में बेचा जा रहा है, वहीं कमर्शियल सिलेंडर 2500 रुपये से भी ऊपर पहुंच गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आपूर्ति सामान्य है, तो बाजार में कृत्रिम संकट कैसे पैदा हो रहा है।
इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित रेस्टोरेंट और होटल संचालक हैं। कमर्शियल गैस की कमी के कारण कई प्रतिष्ठानों का संचालन प्रभावित हो रहा है और कुछ बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। हालात ऐसे हैं कि कई संचालक पुराने कोयला तंदूर फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन पर्यावरणीय नियमों के चलते उन्हें कार्रवाई का डर सता रहा है।
जिला पूर्ति अधिकारी आनन्द कुमार सिंह ने इन आरोपों के बीच स्पष्ट किया है कि गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं को बुकिंग के 2-3 दिन के भीतर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है और पीएनजी-सीएनजी तथा पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति भी पूरी तरह सामान्य है। साथ ही उन्होंने अफवाहों से बचने और अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की है।
हालांकि उपभोक्ताओं ने कुछ गैस एजेंसियों और वितरकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद जानबूझकर आपूर्ति रोकी जा रही है और अपने माध्यमों से सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग की जा रही है। एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जबकि कई जगह कार्यालय बंद रखकर अंदर से सीमित डिलीवरी की जा रही है।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई भी वितरक दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उपभोक्ताओं के लिए शिकायत दर्ज कराने हेतु कंट्रोल रूम नंबर भी जारी किया गया है।
अब बड़ा सवाल यही है कि जब कागजों पर आपूर्ति सामान्य है, तो जमीनी स्तर पर ब्लैक मार्केटिंग क्यों हो रही है और इस पर कब तक लगाम लगेगी।