LPG संकट पर सियासत तेज: विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला, सरकार पर गुमराह करने का आरोप

लखनऊ। देश में लगातार एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की कथित कमी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जनता को गुमराह करने और वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर रही है, जबकि आम जनता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझ रही है।

हवा में बात कर रही है सरकार: राम गोपाल यादव

समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार दावा कर रही है कि देश में गैस, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के प्रतिनिधि जनता के बीच जाएं तो उन्हें वास्तविक स्थिति का अंदाजा हो जाएगा। उनके मुताबिक, देश के कई हिस्सों में होटल और पेट्रोल पंप बंद हो रहे हैं, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।

उन्होंने आगे कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि दिल्ली में लोग कोयला जलाने के लिए अनुमति लेने को मजबूर हैं। यादव ने इसे देश के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति बताते हुए कहा कि सरकार के पास जनता की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लाए गए अधिकतर विधेयक आम जनता के बजाय चुनिंदा पूंजीपतियों के हित में होते हैं।

महंगाई पर कांग्रेस का हमला, आम आदमी पर असर की चिंता

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने एलपीजी की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताते हुए कहा कि घरेलू गैस के दाम केवल एक परिवार को प्रभावित करते हैं, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी पूरे समाज पर असर डालती है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों और रोज कमाने-खाने वाले लोगों पर पड़ता है।

वहीं कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी कीमतों में हुई बढ़ोतरी को बहुत बड़ी बताते हुए कहा कि इससे छात्रों, छोटे उद्योगों और आम उपभोक्ताओं पर व्यापक असर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका सीधा परिणाम यह होगा कि रोजमर्रा की सभी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी, जिससे जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

आपदा में अवसर की राजनीति का आरोप

समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने सरकार पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने के बावजूद जनता को राहत न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें न्यूनतम स्तर पर थीं, तब सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर फायदा उठाया। राय ने इसे “आपदा में अवसर” तलाशने वाली सरकार करार देते हुए कहा कि मौजूदा संकट का भी इस्तेमाल सरकार अपने हित में कर रही है।

बढ़ती कीमतों और कमी के आरोपों से घिरी सरकार

एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि आम जनता महंगाई और संभावित कमी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी हुई है।