जब सुरों में बसा दिखा भारत: पं. रविशंकर जयंती पर गूंजी ‘संगीत की आत्मा’

लखनऊ,। भारत रत्न पंडित रविशंकर की 107वीं जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और पंडित रविशंकर म्यूजिक फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “संगीत की धुनों में भारत की आत्मा” कार्यक्रम का भव्य आयोजन संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह में किया गया। इस अवसर पर संगीत, नृत्य और वादन की त्रिवेणी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह और निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। समारोह में पद्मश्री तरुण भट्टाचार्या, मैसूर मंजूनाथ और रोनू मजूमदार जैसे दिग्गज कलाकारों की उपस्थिति रही। इसके साथ ही नबारुन चटर्जी, निशा चटर्जी और बाबा आशुतोषाम्बर महाराज सहित कई विशिष्ट जन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभावी “भारत गान” से हुई, जिसमें लगभग 25 छात्र-छात्राओं ने तिरंगा वेशभूषा में देशभक्ति का भाव प्रस्तुत किया। इसके बाद पंडित रविशंकर के पौत्र आर्यन चटर्जी ने सरोद वादन से श्रोताओं को प्रभावित किया।
समारोह का मुख्य आकर्षण रहा संगीत की त्रिवेणी, जिसमें संतूर, बांसुरी और वायलिन का अद्भुत संगम देखने को मिला। पद्मश्री तरुण भट्टाचार्या के संतूर वादन ने जहां श्रोताओं को भावविभोर किया, वहीं पंडित मैसूर मंजूनाथ के वायलिन और पद्मश्री पंडित रोनू मजूमदार की बांसुरी ने माहौल को सुरमयी बना दिया। तबला वादन में पंडित देव नारायण मिश्रा और युवा कलाकार ज्योतिर्मय रॉय चौधरी ने भी अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में वैदिक गुरुकुल आश्रम के बच्चों द्वारा शांति पाठ किया गया, वहीं कलाकारों का सम्मान भी किया गया। अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत ने कहा कि संस्था एक ओर जहां नई प्रतिभाओं को मंच दे रही है, वहीं लुप्त होती कलाओं के संरक्षण के लिए भी लगातार प्रयासरत है।
इस अवसर पर प्रदेश सरकार की कला संरक्षण नीति के तहत सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से देखने को मिली। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।