निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्रवाईयों के विरोध में बिजली-कर्मियों का जोरदार विरोध प्रदर्शन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से निजीकरण एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में चल रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय, आगरा में बिजली कर्मियों की जोरदार विरोध सभा आयोजित की गई। इस दौरान सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने 19 मार्च 2023 को संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में पॉवर कारपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन के फलस्वरूप की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं। ऊर्जा मंत्री द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में हटाए गए संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली, सभी मुकदमे एवं एफआईआर वापस लेने सहित सभी दंडात्मक कार्यवाहियां समाप्त करने की घोषणा की गई थी।

क्या कहना है संघर्ष समिति का

संघर्ष समिति ने कहा कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि आज तक उत्पीड़न की कोई भी कार्यवाही वापस नहीं ली गई। ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बिजली कर्मियों को उन्हें लागू कराने हेतु सड़क पर उतरने को विवश होना पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि नवंबर 2024 में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के निर्णय के बाद से बिजली कर्मी बिना कार्य बाधित किए शांतिपूर्ण ढंग से बिजली पंचायत, बिजली महापंचायत, क्रमिक अनशन, रैली एवं विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन अनावश्यक रूप से उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां जारी रखे हुए है, जिससे कार्य का वातावरण प्रभावित हो रहा है।

बिजली-कर्मियों का शांतिपूर्ण आंदोलन रहेगा जारी

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान बिजली कर्मी उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संकल्पबद्ध हैं, किन्तु प्रबंधन लगातार उत्पीड़न की नीति अपनाकर बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की दिशा में कार्य कर रहा है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मियों का शांतिपूर्ण आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता तथा सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जातीं।