आचार्य सुबल सागर के सानिध्य में इंदिरानगर जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य शुभारंभ


लखनऊ। दिगंबर जैन समाज के परम पूज्य आचार्य सुबल सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में मंगलवार को इंदिरानगर स्थित जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य एवं श्रद्धापूर्ण शुभारंभ हुआ। घट यात्रा, ध्वजारोहण, अभिषेक, शांतिधारा और मंत्र जाप के साथ पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण छा गया।


कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल ढोल-नगाड़ों और धार्मिक जयघोष के बीच निकाली गई भव्य घट यात्रा से हुई। कलशों के पवित्र जल से भूमि शुद्धि की गई। प्रथम घट कलश धारण करने का सौभाग्य श्रीमती आकांक्षा जैन को प्राप्त हुआ। इसके बाद भगवान की वेदी के समक्ष सिद्धचक्र मंडल की रचना की गई तथा ध्वजारोहण कर सभी दिशाओं के देवी-देवताओं से अनुष्ठान की आज्ञा ली गई। ध्वजारोहण का सौभाग्य महावीर गंगवाल को प्राप्त हुआ।


विधान के दौरान सौधर्म इंद्र के रूप में अक्षय जैन तथा धनकुबेर के रूप में आकाश जैन ने भगवान का अभिषेक किया। जैन समाज के अध्यक्ष पी.के. जैन ने विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं लोककल्याण की कामना के साथ शांतिधारा संपन्न कराई।
आचार्य सुबल सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि सिद्धों की आराधना से समस्त पापों का क्षय होता है और जीवन की बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को “ॐ ह्रीं अरहम अ सि उ अ सा नमः” मंत्र के सवा लाख जाप का संकल्प दिलाया और आत्मकल्याण तथा आध्यात्मिक उन्नति का संदेश दिया।
प्रतिष्ठाचार्य आशीष जी एवं पुण्यांश जी ने पूरे विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान की सभी क्रियाएं संपन्न कराईं। जैन समाज के महामंत्री अभिषेक जैन ने बताया कि इस आठ दिवसीय विधान में 200 दंपति संकल्पपूर्वक विधान में सहभागी बने हैं, जबकि 500 से अधिक श्रद्धालु महिला एवं पुरुष भी नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं।
इस अवसर पर अनुरोध जैन, आयुष जैन, दिव्य, अतिशय, भरत सहित दिगंबर जैन समाज के अनेक गणमान्य सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।