UP Assembly Monsoon Session 2026: अनुपूरक बजट पर गरमाई विधानसभा, राम मंदिर चढ़ावा मुद्दे पर सत्ता-विपक्ष में तीखी नोकझोंक

उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन 59,019 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पर चर्चा हुई।

यूपी विधानसभा मानसून सत्र के दौरान अनुपूरक बजट पर चर्चा
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में अनुपूरक बजट और विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही।

नई दिल्ली/अमर भारती। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन भी जोरदार हंगामे और तीखी राजनीतिक नोकझोंक के बीच बीता। सदन में योगी सरकार द्वारा पेश किए गए 59,019 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट पर चर्चा हुई, वहीं विपक्ष ने एक बार फिर राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े कथित विवाद को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उन्हें राजनीतिक एजेंडा करार दिया। बजट पर चर्चा के दौरान सरकार ने इसे प्रदेश के विकास, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों के हित में बताया, जबकि विपक्ष ने इसे “दिशाहीन और जनहित से दूर” करार देते हुए कई सवाल उठाए।

अनुपूरक बजट पर सरकार का पक्ष

योगी सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में 59,019 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया था। बुधवार को इस पर विस्तृत चर्चा हुई। सरकार की ओर से कहा गया कि अतिरिक्त बजट का उद्देश्य राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं को गति देना, कानून-व्यवस्था को और मजबूत करना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना है। सत्ता पक्ष के विधायकों ने दावा किया कि यह बजट उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

विपक्ष ने उठाए कई सवाल

अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। विपक्ष का आरोप था कि सरकार रोजगार, महंगाई, किसानों की समस्याओं और युवाओं से जुड़े अहम मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। विपक्षी सदस्यों ने बजट में कई योजनाओं के लिए किए गए प्रावधानों की पारदर्शिता और उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सदन में हंगामा

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष ने एक बार फिर राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े कथित मामले को उठाया। विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा और आरोप लगाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तथ्यों से परे राजनीतिक आरोप लगाकर सदन का समय बर्बाद किया जा रहा है। सत्ता पक्ष ने कहा कि विपक्ष जनता के मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है। हंगामे के कारण कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

मंगलवार को हुए हंगामे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी, पर सदन की गरिमा भंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक चर्चा का सर्वोच्च मंच है और यहां शालीनता तथा संसदीय परंपराओं का पालन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता ने जनहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए प्रतिनिधियों को सदन में भेजा है, इसलिए अनावश्यक हंगामा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

सचिन यादव के निष्कासन पर जारी सियासत

मानसून सत्र के दौरान सबसे अधिक चर्चा समाजवादी पार्टी के विधायक सचिन यादव के निष्कासन को लेकर भी रही। मंगलवार को सदन में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लहराई थी, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें पूरे मानसून सत्र की शेष कार्यवाही से निष्कासित कर दिया। बुधवार को भी यह मुद्दा सदन के अंदर और बाहर चर्चा का विषय बना रहा।

विधानसभा अध्यक्ष ने जताई नाराजगी

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सचिन यादव जैसे युवा विधायक संसदीय मर्यादा का पालन करेंगे, लेकिन उनका व्यवहार निराशाजनक रहा। महाना ने कहा कि विधानसभा में किसी भी सदस्य को नियमों और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। यदि कोई सदस्य जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करना आवश्यक हो जाता है।

विपक्ष ने कार्रवाई को बताया कठोर

समाजवादी पार्टी ने सचिन यादव के निष्कासन को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। विपक्ष का कहना है कि सरकार असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है और विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। सपा नेताओं ने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दे उठाना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है और इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

आगे भी जारी रह सकता है गतिरोध

मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी रहने के आसार हैं। विपक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि वह राम मंदिर चढ़ावा विवाद, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरता रहेगा। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह अनुपूरक बजट और विकास कार्यों पर सार्थक चर्चा चाहती है तथा विपक्ष को सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देना चाहिए। अब सभी की नजर मानसून सत्र की आगामी बैठकों पर है, जहां कई महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

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