
उन्नाव: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने हैबियस कॉर्पस रिट याचिका संख्या 232/2026 पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने कहा कि मामले में गुमशुदगी से संबंधित एफआईआर की जांच पहले से जारी है और अब तक रेस्पोंडेंट संख्या 4 से 7 के खिलाफ अवैध हिरासत का कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि दुर्गेश मिश्रा उर्फ खोनू को रेस्पोंडेंट संख्या 4 से 7 ने अवैध रूप से अपनी हिरासत में रखा है। इस पर न्यायालय ने पूर्व में पुलिस को निर्देश दिया था कि यदि दुर्गेश मिश्रा उक्त रेस्पोंडेंट्स की अभिरक्षा में मिले तो उन्हें बरामद कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
निर्देश के अनुपालन में पुलिस ने विस्तृत जांच की, कई विवेचना पर्चे तैयार किए और विभिन्न संभावित स्थानों पर तलाश अभियान चलाया, लेकिन दुर्गेश मिश्रा का कोई पता नहीं चल सका।
सुनवाई के दौरान थाना गंगाघाट के प्रभारी निरीक्षक ने न्यायालय में व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर बताया कि लापता व्यक्ति की तलाश लगातार जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक की जांच में रेस्पोंडेंट संख्या 4 से 7 द्वारा अवैध हिरासत में रखने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है।
न्यायालय ने अपने आदेश में पूनम कुशवाहा बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि जब गुमशुदगी की एफआईआर पर पुलिस जांच जारी हो और अवैध हिरासत का आरोप प्रथम दृष्टया स्थापित न हो, तब समानांतर हैबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य नहीं होती। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।
मामले में रेस्पोंडेंट संख्या 4 से 7 की ओर से अधिवक्ता चैतन्य तिवारी ने न्यायालय में पक्ष रखा।