परियर (उन्नाव): विकास खंड सिकंदरपुर सरोसी के मरौंदा मझवारा गांव में मुख्य बाजार का नाला पिछले करीब दस वर्षों से बदहाली का शिकार है। नाले की टूटी बाउंड्री और जर्जर हालत के चलते आसपास के मकानों, प्राथमिक विद्यालय और ग्रामीणों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बरसात के मौसम में कल्याणी नदी का बाढ़ का पानी इसी नाले के जरिए गांव में प्रवेश कर जाता है, जिससे हर साल जलभराव और कटान की समस्या विकराल हो जाती है।

ग्रामीणों के मुताबिक करीब दस वर्ष पहले नाले की पक्की ईंटों की बाउंड्री ढह गई थी। इसके बाद से न तो उसकी मरम्मत कराई गई और न ही नियमित सफाई हुई। प्रशासन की अनदेखी के कारण नाला पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।
नाले के किनारे रहने वाले बीरेन्द्र सिंह का मकान सबसे अधिक खतरे की जद में है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से नाले के किनारे की मिट्टी कट रही है, जिससे मकान कभी भी गिर सकता है। वहीं पास स्थित प्राथमिक विद्यालय और कई अन्य मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह नाला सीधे कल्याणी नदी से जुड़ा है। नदी में बाढ़ आने पर उसका पानी नाले के माध्यम से गांव में घुस जाता है, जिससे जलभराव के साथ-साथ कटान भी तेज हो जाती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नाले की मरम्मत और सुरक्षा कार्य नहीं कराया गया तो बड़ा हादसा हो सकता है।
राजेश गौतम, जमुना, श्यामजी द्विवेदी, अनिल गौतम समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं। उनका आरोप है कि पहले नाले के निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था, लेकिन बजट कम होने का हवाला देकर योजना को मरौंदा के हीरा खेड़ा क्षेत्र की ओर स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद दोबारा निर्माण का प्रस्ताव नहीं भेजा गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बरसात के दौरान किसी संभावित दुर्घटना से पहले नाले की तत्काल सफाई कराई जाए तथा मजबूत पक्की बाउंड्री का निर्माण कराया जाए, ताकि गांव, विद्यालय और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
क्या बोले अधिकारी?
एडीओ पंचायत विनोद वर्मा ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। गुरुवार को ग्राम विकास अधिकारी को मौके पर भेजकर नाले का निरीक्षण कराया जाएगा। निरीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।