20.80 लाख की अस्पताल बिल्डिंग सड़क से 2 फीट नीचे, गेट पर कीचड़ में फिसल रहे मरीज

गोला गोकर्णनाथ, खीरी। शासन की योजना और सरकारी धन से तैयार की गई एक स्वास्थ्य सुविधा निर्माण की लापरवाही के चलते मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। कुंभी ब्लॉक के कस्बा अजान की नई बस्ती में करीब 20 लाख 80 हजार रुपये की लागत से बनी राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय की नई इमारत मुख्य सड़क से करीब दो फीट नीचे बना दी गई है। इसके चलते हल्की बारिश में ही परिसर में जलभराव और कीचड़ की स्थिति पैदा हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल तक पहुंचने के लिए न तो पक्का संपर्क मार्ग बनाया गया है और न ही परिसर में पर्याप्त मिट्टी भराव कराया गया है। ऐसे में मरीजों को कीचड़ और फिसलन के बीच अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 1992 से चल रहा था अस्पताल
बताया जाता है कि राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय वर्ष 1992 से कस्बे की मेला कमेटी की बिल्डिंग में संचालित हो रहा था। पुरानी बिल्डिंग जर्जर होने के बाद वर्ष 2018 में अस्पताल को इमलिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया था।
लंबे समय के प्रयास के बाद शासन ने अस्पताल के लिए नई बिल्डिंग स्वीकृत की। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि नई इमारत बनने के बाद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी, लेकिन निर्माण में कथित लापरवाही के चलते समस्या और बढ़ गई।
कागजों में एक अगस्त को पूरा हुआ निर्माण
ग्रामीणों के मुताबिक कार्यदायी संस्था ने एक अगस्त को निर्माण कार्य पूरा दिखाया और 8 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग को बिल्डिंग हैंडओवर कर दी गई। इसके बाद 16 अगस्त से बिना उद्घाटन और बिना किसी सार्वजनिक सूचना के नई बिल्डिंग से अस्पताल का संचालन शुरू करा दिया गया।
मौके की स्थिति को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल तक पहुंचने के लिए न खड़ंजा है, न पक्की सड़क और न ही इंटरलॉकिंग की व्यवस्था। परिसर में पर्याप्त मिट्टी भराव भी नहीं कराया गया है। परिसर में घास-फूस और झाड़ियां उगी हैं, जबकि कई कमरों का फर्श भी अधूरा बताया जा रहा है। बारिश के दौरान जलभराव के कारण मरीजों के बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
‘कीचड़ से होकर अस्पताल पहुंचते हैं मरीज’
ग्रामीण रामनिवास, हरिओम, सतीश कुमार, रवि प्रकाश, सलीम और नसीम ने बताया कि अस्पताल पहुंचने में सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को होती है। ग्रामीणों के अनुसार फिसलन के कारण मरीजों के गिरने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 20 लाख रुपये से अधिक की लागत से बनी यह इमारत सरकारी धन के उपयोग पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जांच होने पर निर्माण से जुड़े जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मामले की जांच कराने के साथ अस्पताल परिसर में मिट्टी भराव और पक्के संपर्क मार्ग का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को अस्पताल पहुंचने में परेशानी न हो।
बोले अधिकारी
इस संबंध में जिला होम्योपैथिक अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि मिट्टी भराव उनके एस्टीमेट में शामिल नहीं था। उन्होंने कहा कि सड़क से नीचे ढलान के लिए अलग से बजट नहीं आता है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल की बिल्डिंग का हैंडओवर ग्राम प्रधान की मौजूदगी में हुआ है। प्रधान से कहा गया है कि यदि कहीं खुदाई होती है तो निकलने वाली मिट्टी अस्पताल परिसर में डलवा दी जाएगी।
अधिकारी के मुताबिक यह कार्य जेई के क्षेत्र में नहीं आता है। भवन निर्माण से संबंधित अन्य जानकारी कार्यदायी संस्था ही उपलब्ध करा सकती है।