कौशांबी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट: 11 मौतों के बाद उठे बड़े सवाल, लाइसेंस रद्द होने के बावजूद कैसे चल रही थी फैक्ट्री?

कौशांबी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में 11 की मौत, 8 बच्चे शामिल

कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट
कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट के बाद तबाही का मंजर।

नई दिल्ली/अमर भारती। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट ने सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 31 अगस्त को मनौरी इलाके में हुए धमाके में 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें 8 बच्चे शामिल हैं, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ घर पूरी तरह ढह गए। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया। घटनास्थल से मलबा हटाकर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कहीं कोई और व्यक्ति तो दबा नहीं है।

लाइसेंस रद्द होने के बाद भी कैसे चलती रही फैक्ट्री?

पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था तो वहां पटाखों का निर्माण और भंडारण कैसे जारी रहा? जिलाधिकारी के मुताबिक संबंधित गोदाम का लाइसेंस करीब दो साल पहले निरस्त किया गया था। इसके बावजूद मनौरी इलाके में पटाखों का निर्माण और भंडारण जारी रहने की बात सामने आई है। यही बिंदु अब पुलिस और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। घटना के बाद पुलिस-प्रशासन की भूमिका की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

11 मौतों के बाद कार्रवाई, लेकिन निगरानी पर सवाल

स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि इलाके में बड़े पैमाने पर पटाखों का निर्माण और भंडारण हो रहा था तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक क्यों नहीं पहुंची। पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने को लेकर सवाल बने हुए हैं। अब जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि लाइसेंस निरस्त होने के बाद फैक्ट्री को बंद कराने के लिए क्या कदम उठाए गए थे और उनका पालन किस स्तर तक हुआ।

धमाका इतना भीषण क्यों था?

प्रत्यक्षदर्शियों और घटनास्थल की तस्वीरों के मुताबिक पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट की तीव्रता बेहद ज्यादा थी। आसपास के मकानों को नुकसान पहुंचा और बिजली की लाइनें भी प्रभावित हुईं। हालांकि सोशल मीडिया और ग्रामीणों के बीच विस्फोटक सामग्री को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन RDX या किसी अन्य सैन्य विस्फोटक की मौजूदगी की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

ATS, IB और अन्य एजेंसियों की जांच

विस्फोट के बाद स्थानीय पुलिस के साथ सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के अवशेषों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फैक्ट्री में किस तरह के पटाखे बनाए जा रहे थे, वहां कितना विस्फोटक पदार्थ मौजूद था और सुरक्षा नियमों का कितना पालन किया गया था। फिलहाल पुलिस की शुरुआती जांच में घटना को पटाखा निर्माण से जुड़ा विस्फोट माना जा रहा है। विस्तृत फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही विस्फोट की वास्तविक प्रकृति और कारणों पर अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

कौशांबी हादसे ने फिर उठाया सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

कौशांबी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि अवैध निर्माण और भंडारण पर निगरानी की व्यवस्था के लिए भी बड़ा सवाल है। लाइसेंस रद्द होने के बावजूद गतिविधियां जारी रहने की पुष्टि जांच में होती है तो यह तय करना जरूरी होगा कि जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाए।

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