
एसपी शुक्ला
बाराबंकी। महाभारत कालीन सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल लोधेश्वर महादेवा में कजरी तीज के पावन अवसर पर सोमवार को आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा लोधेश्वर के दर्शन-पूजन कर विधि-विधान से जलाभिषेक किया और मनवांछित फल की कामना की। मंदिर परिसर दिनभर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंजता रहा। सीतापुर, लखीमपुर, लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, बहराइच, जालौन और गोंडा समेत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु बाबा लोधेश्वर के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे।
कजरी तीज को लेकर रविवार रात से ही श्रद्धालुओं के लोधेश्वर धाम पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सोमवार रात 12 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। हाथों में जल से भरे लोटे, बेलपत्र, भांग, धतूरा, सुगंधित पुष्प और अन्य पूजन सामग्री लेकर श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा लोधेश्वर का जलाभिषेक करते रहे। मंदिर परिसर में चारों ओर भक्ति और आस्था का माहौल नजर आया। दूर-दराज से आए श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे और भगवान शिव के दर्शन के बाद स्वयं को धन्य महसूस किया।
सुहागिन महिलाओं ने रखा व्रत, मांगी सुख-समृद्धि
कजरी तीज के अवसर पर बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने बाबा लोधेश्वर का जलाभिषेक कर पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में महिलाओं की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था। भोर से लेकर देर रात तक मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और गर्भगृह में भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन और पुलिस के जवान श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन, पूजन और जलाभिषेक कराने में जुटे रहे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग और कतार व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में पूरे आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया गया।
52 ज्योतिर्लिंगों में एक है लोधेश्वर महादेव मंदिर
मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि लोधेश्वर महादेव मंदिर की महिमा दूर-दूर तक प्रसिद्ध है और इसे 52 ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है। कजरी तीज के अवसर पर हर वर्ष विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा लोधेश्वर का जलाभिषेक करते हैं। उन्होंने बताया कि लोधेश्वर महादेव का शिवलिंग स्वयंभू है और इसके प्रकट होने को लेकर क्षेत्र में प्राचीन धार्मिक मान्यता प्रचलित है।
किसान लोधेराम को खुदाई के दौरान मिला था स्वयंभू शिवलिंग
प्राचीन मान्यता के अनुसार किसान लोधेराम अपने खेत में जुताई और सिंचाई कर रहे थे। इसी दौरान पानी के बहाव को लेकर उन्हें परेशानी होने लगी। पानी हटाने के लिए जब उन्होंने फावड़े से जमीन की खुदाई की तो फावड़ा एक चट्टान से टकरा गया। इसके बाद जब उस स्थान पर खुदाई की गई तो वहां से शिवलिंग प्रकट हुआ। मान्यता है कि इसी स्वयंभू शिवलिंग को बाद में लोधेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
काशी की तर्ज पर बन रहा भव्य कॉरिडोर
लोधेश्वर महादेव धाम को और भव्य एवं सुविधायुक्त बनाने के लिए यहां काशी की तर्ज पर भव्य कॉरिडोर का निर्माण कार्य भी चल रहा है। कॉरिडोर के निर्माण के बाद धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इससे दर्शन-पूजन के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधाओं में कमी आएगी और लोधेश्वर धाम को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी। आस्था, परंपरा और आधुनिक सुविधाओं के संगम के साथ लोधेश्वर महादेव धाम आने वाले समय में और भी भव्य स्वरूप में नजर आएगा।