UNGA में नेतन्याहू के भाषण पर बड़ा वॉकआउट, ये मुस्लिम देश रहे मौजूद

UNGA में नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने वॉकआउट किया। UAE, बहरीन, मोरक्को और अजरबैजान के रुख और इजरायल से रिश्ते जानिए।

UNGA में बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने वॉकआउट किया।
UNGA में बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधियों ने वॉकआउट किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान बड़ी संख्या में देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर निकल गए। नेतन्याहू जैसे ही मंच पर पहुंचे, कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने वॉकआउट किया। इस दौरान महासभा का बड़ा हिस्सा खाली नजर आया। विभिन्न रिपोर्टों में करीब 70 प्रतिनिधिमंडलों के वॉकआउट या अनुपस्थित रहने की बात सामने आई है, जबकि इजरायल ने बाद में ऐसे देशों की संख्या 77 बताई।

नेतन्याहू के भाषण से पहले ही इजरायल की गाजा में सैन्य कार्रवाई और पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस चल रही थी। कई देशों के प्रतिनिधियों ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन और गाजा की स्थिति पर इजरायल की नीतियों की आलोचना की थी।

नेतन्याहू के मंच पर आते ही प्रतिनिधियों का वॉकआउट

नेतन्याहू के भाषण की शुरुआत होते ही कई प्रतिनिधिमंडल अपनी सीटों से उठकर बाहर चले गए। रिपोर्टों के मुताबिक तुर्की, फिलिस्तीन, ट्यूनीशिया, सीरिया, अल्जीरिया, यमन, मिस्र, इराक, सऊदी अरब, जॉर्डन, ईरान, कतर, लेबनान, मलेशिया, इंडोनेशिया और कुवैत समेत कई देशों के प्रतिनिधि इस विरोध में शामिल थे या भाषण के दौरान अनुपस्थित रहे।

वॉकआउट के बाद महासभा हॉल में मौजूद प्रतिनिधियों की संख्या काफी कम दिखाई दी। कुछ देशों ने अपने वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बजाय कनिष्ठ अधिकारियों को हॉल में रहने दिया, जबकि कुछ प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह अनुपस्थित रहे।

नेतन्याहू ने वॉकआउट करने वालों पर साधा निशाना

नेतन्याहू ने अपने भाषण की शुरुआत ही उन प्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए की, जो उनके मंच पर पहुंचते ही हॉल से बाहर चले गए थे। उन्होंने वॉकआउट करने वालों को “मोरल काउर्ड्स” यानी “नैतिक रूप से कायर” कहा।

नेतन्याहू ने अपने भाषण में इजरायल की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया और ईरान, हमास तथा इजरायल की नीतियों के आलोचकों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है और उसका सैन्य अभियान अपने नागरिकों की रक्षा से जुड़ा है।

दूसरी ओर, इजरायल की सैन्य कार्रवाई और गाजा में मानवीय स्थिति को लेकर कई देशों की ओर से लगातार आलोचना की जा रही है। इसलिए नेतन्याहू का UNGA भाषण इस वर्ष महासभा के सबसे विवादित संबोधनों में से एक रहा।

ज्यादातर मुस्लिम देशों ने किया विरोध

नेतन्याहू के भाषण के दौरान वॉकआउट करने वाले देशों में बड़ी संख्या मुस्लिम-बहुल देशों की थी। सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया और कतर जैसे देशों की ओर से इजरायल की नीतियों को लेकर पहले भी सार्वजनिक रूप से आलोचनात्मक रुख सामने आया है।

हालांकि, मुस्लिम देशों का रुख एक जैसा नहीं रहा। कुछ मुस्लिम-बहुल देशों ने इजरायल के साथ राजनयिक या रणनीतिक संबंध बनाए रखे हैं और नेतन्याहू के भाषण के दौरान उनका प्रतिनिधित्व हॉल में मौजूद रहा।

UAE और इजरायल के रिश्ते

संयुक्त अरब अमीरात उन अरब देशों में शामिल है, जिसने अब्राहम समझौते के तहत 2020 में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक और कारोबारी संपर्क बढ़े हैं।

UNGA में नेतन्याहू के भाषण के दौरान UAE का प्रतिनिधि हॉल में मौजूद रहा। इसे दोनों देशों के बीच जारी राजनयिक संबंधों के संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि, किसी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी को स्वतः इजरायल की हर नीति के समर्थन के रूप में नहीं माना जा सकता।

बहरीन ने भी 2020 में बनाए राजनयिक संबंध

बहरीन भी 2020 में अब्राहम समझौते की प्रक्रिया के तहत इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने वाले देशों में शामिल हुआ था। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद आधिकारिक संपर्क और सहयोग के रास्ते खुले।

गाजा युद्ध के बाद अरब देशों और इजरायल के बीच संबंधों को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर काफी राजनीतिक दबाव रहा है, लेकिन बहरीन और इजरायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध कायम रहे हैं।

मोरक्को और इजरायल के बीच संबंध

मोरक्को ने दिसंबर 2020 में इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की थी। यह भी अब्राहम समझौते से जुड़ी व्यापक कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा था।

इसके बाद दोनों देशों ने राजनयिक और अन्य क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाया। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण मोरक्को समेत कई अरब और मुस्लिम देशों के लिए इजरायल के साथ संबंध एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बने हुए हैं।

अजरबैजान का मामला अलग

अजरबैजान का संबंध बाकी तीन देशों से अलग है। उसने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन इजरायल के साथ उसके लंबे समय से रणनीतिक संबंध हैं।

दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग रहा है। यही वजह है कि अजरबैजान की इजरायल के साथ कूटनीतिक स्थिति को UAE, बहरीन और मोरक्को से अलग संदर्भ में समझा जाता है।

UNGA में दिखी पश्चिम एशिया की गहरी कूटनीतिक खाई

नेतन्याहू के भाषण के दौरान हुआ वॉकआउट केवल एक कार्यक्रम से जुड़ी घटना नहीं है। यह पश्चिम एशिया के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में मौजूद गहरे राजनीतिक मतभेदों को भी सामने लाता है।

एक तरफ कई देशों ने इजरायल की सैन्य कार्रवाई और गाजा की मानवीय स्थिति को लेकर विरोध दर्ज कराया, वहीं अमेरिका और कुछ अन्य देशों के प्रतिनिधि हॉल में मौजूद रहे। इस बीच नेतन्याहू ने अपने भाषण में इजरायल की कार्रवाई का बचाव करते हुए उसके आलोचकों पर तीखा हमला किया।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मतभेद अभी भी गहरे हैं। UNGA का यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की कूटनीति और इजरायल के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर होने वाली बहस को और तेज कर सकता है।

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