IIT बॉम्बे में साहिल वाकोडे की मौत के बाद 18 मांगों पर सहमति बनी। प्रो. दूल्ला निलंबित, संस्थान ने माफी मांगी; निदेशक के इस्तीफे पर सस्पेंस है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। IIT बॉम्बे में सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद कैंपस में जारी छात्रों के प्रदर्शन के बीच सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। प्रदर्शनकारी छात्रों और संस्थान प्रशासन के बीच बातचीत के बाद 18 सूत्रीय मांगों पर सहमति बनी है। निदेशक प्रो. शिरीष बी. केदारे ने रविवार रात छात्रों के सामने कहा था कि वह इस्तीफा देंगे, लेकिन सोमवार को IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया कि निदेशक ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। उनके इस्तीफे पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक और निर्धारित प्रक्रिया के बाद फैसला होना है।
वहीं, छात्र की मौत से जुड़े मामले में छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। संस्थान ने अपने शुरुआती संचार को लेकर माफी भी मांगी है।
साहिल वाकोडे की मौत के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन
साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में सेकंड ईयर बीटेक के छात्र थे। उनकी 18 सितंबर को हॉस्टल में मौत हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी मौत से कुछ घंटे पहले मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर मामला सामने आया था।
साहिल की मौत के बाद छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने घटना की स्वतंत्र जांच, प्रशासनिक जवाबदेही, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं और परीक्षा एवं अनुशासन से जुड़ी प्रक्रियाओं में सुधार समेत कई मांगें रखीं।
18 सूत्रीय मांगों पर प्रशासन से बनी सहमति
तीन दिनों से जारी प्रदर्शन के बीच रविवार रात छात्रों और IIT बॉम्बे प्रशासन के बीच करीब तीन घंटे तक बातचीत हुई। छात्रों द्वारा रखे गए 18 सूत्रीय चार्टर पर निदेशक शिरीष केदारे ने हस्ताक्षर किए। हालांकि, संस्थान की ओर से यह भी कहा गया कि कई मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा और सभी मांगों का तत्काल क्रियान्वयन नहीं माना जा सकता।
छात्रों की प्रमुख मांगों में साहिल की मौत की स्वतंत्र जांच, प्रशासनिक जवाबदेही, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और छात्रों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाना शामिल है।
प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला निलंबित
छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा के दौरान ड्यूटी पर मौजूद प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल थी। सोमवार को IIT बॉम्बे ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। संस्थान के अनुसार, आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी। दूल्ला का नाम साहिल के परिवार की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में भी आया है।
हालांकि, IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने दूल्ला का समर्थन किया है। फोरम का कहना है कि वह परीक्षा के दौरान अपनी निर्धारित जिम्मेदारी निभा रहे थे और संस्थान की प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की थी।
संस्थान ने शुरुआती बयान पर मांगी माफी
प्रदर्शनकारी छात्रों ने IIT बॉम्बे के उस शुरुआती संचार पर भी आपत्ति जताई थी, जिसमें साहिल के परीक्षा के दौरान AI प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी दी गई थी। छात्रों का कहना था कि मृत छात्र के खिलाफ इस तरह की जानकारी देना अनुचित था और इससे उसकी छवि प्रभावित हुई। इसके बाद IIT बॉम्बे ने अपने शुरुआती बयान को लेकर माफी मांगी और कहा कि उस तरह का संचार उचित नहीं था।
स्वतंत्र जांच और समयसीमा की मांग
छात्रों ने साहिल की मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनके चार्टर में 30 सितंबर तक अंतरिम रिपोर्ट और 15 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट देने की मांग शामिल है। इसके अलावा छात्रों ने 22 सितंबर तक एक ओपन हाउस आयोजित करने की मांग की है, जिसमें निदेशक, संबंधित डीन और एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख सहित अधिकारी छात्रों के सवालों का जवाब दें।
मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग
18 सूत्रीय मांगों में IIT बॉम्बे की मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। छात्रों ने फैकल्टी और स्टाफ के लिए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संवेदनशीलता कार्यक्रम, बेहतर इन-पर्सन काउंसलिंग और IIT बॉम्बे अस्पताल में 24 घंटे मनोचिकित्सक ऑन-कॉल सुविधा की मांग की है।
इसके अलावा छात्रों ने एक टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें छात्र, फैकल्टी, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और बाहरी विशेषज्ञ शामिल हों। यह टास्क फोर्स छात्र तनाव के कारणों का अध्ययन कर हर सेमेस्टर रिपोर्ट प्रकाशित करे—ऐसी मांग भी रखी गई है।
प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र प्रतिनिधित्व पर जोर
छात्रों ने प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने, संस्थान की निर्णय प्रक्रिया में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने और अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ी प्रक्रिया में बदलाव की भी मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। साथ ही 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब और 26 सितंबर तक मांगों के क्रियान्वयन की योजना देने की मांग की गई है।
निदेशक के इस्तीफे पर अभी स्थिति साफ नहीं
रविवार देर रात प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत के दौरान निदेशक शिरीष केदारे ने कहा था कि वह इस्तीफा देंगे, लेकिन इसके लिए संस्थागत प्रक्रिया का पालन करना होगा। IIT बॉम्बे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक सोमवार को बुलाई गई है।
हालांकि, सोमवार को IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया कि निदेशक ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। इसलिए फिलहाल उनकी ओर से इस्तीफे की घोषणा और औपचारिक रूप से इस्तीफा दिए जाने के बीच अंतर है। छात्रों के चार्टर में यह भी मांग है कि यदि तय समय में सुधार लागू नहीं होते हैं तो निदेशक और संबंधित अधिकारियों को इस्तीफा देना चाहिए।
आगे क्या होगा?
IIT बॉम्बे में अब छात्रों की 18 मांगों के क्रियान्वयन, स्वतंत्र जांच, प्रो. दूल्ला के खिलाफ आगे की कार्रवाई और निदेशक के इस्तीफे को लेकर प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल संस्थान ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन छात्रों की मांगों के अनुसार कई फैसलों की अंतिम समयसीमा अभी आगे है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सहमति के बाद इन मांगों को किस तरह लागू किया जाता है और साहिल वाकोडे की मौत की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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