JPSC विवाद: 10 दिन से भूख हड़ताल, छात्रों ने कहा- न्याय दो या जवाब दो

JPSC विवाद: भूख हड़ताल और अनशन से 14वीं JPSC छात्र आंदोलन बना राज्यव्यापी मुद्दा

JPSC छात्र आंदोलन के दौरान रांची में प्रदर्शन करते अभ्यर्थी
रांची में JPSC छात्र आंदोलन के दौरान जुटे अभ्यर्थी और समर्थक।

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल अब बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुके हैं। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन लगातार दसवें दिन भी जारी है। रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम इन दिनों राज्य के सबसे बड़े छात्र आंदोलन का केंद्र बना हुआ है, जहां अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग पर डटे हुए हैं।

14वीं JPSC छात्र आंदोलन कैसे बना राज्यव्यापी मुद्दा?

25 जुलाई से शुरू हुआ JPSC छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा परिणामों या चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। आंदोलनकारी छात्रों का आरोप है कि 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं और इससे योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ा है।

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र, अभ्यर्थी और उनके समर्थक जुट रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार और आयोग दोनों की जिम्मेदारी है। छात्रों का आरोप है कि यदि भर्ती प्रक्रिया पर सवाल लगातार उठते रहेंगे तो युवाओं का विश्वास सरकारी संस्थाओं से कमजोर होगा।

इसी कारण JPSC छात्र आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित न रहकर राज्य में रोजगार और भर्ती व्यवस्था से जुड़े व्यापक सवालों का प्रतीक बन गया है।

भूख हड़ताल और अनशन ने आंदोलन को दी नई दिशा

आंदोलन के दौरान कई छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। एक गुट का नेतृत्व झारखंड लोकतांत्रिक क्रांति मोर्चा (JLKM) से जुड़े देवेंद्र महतो कर रहे हैं। छात्रों के बीच उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, देवेंद्र महतो ने पहले भूख हड़ताल शुरू की और बाद में यह आंदोलन और तेज हो गया। दूसरी ओर ब्रह्मानंद भी खुले आसमान के नीचे आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि विद्यार्थियों के अधिकारों के साथ अन्याय किया जा रहा है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि अपने भविष्य और रोजगार के अधिकार के लिए है। यही वजह है कि JPSC छात्र आंदोलन में विभिन्न जिलों से आए अभ्यर्थियों की भागीदारी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

छात्रों का आरोप- भर्ती एजेंसी की भूमिका की हो निष्पक्ष जांच

आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छात्रों की मांग है कि परीक्षा को रद्द कर नई और पारदर्शी परीक्षा आयोजित की जाए।

साथ ही वे नियमित भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की भी मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार होने वाली देरी और विवाद उनके करियर पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

कई अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों तक तैयारी करने के बावजूद उन्हें निष्पक्ष अवसर नहीं मिल पा रहा है। इसी नाराजगी ने JPSC छात्र आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में भूमिका निभाई है।

आंदोलन में शामिल छात्रों का दर्द और नाराजगी

रांची के आंदोलन स्थल पर मौजूद कई छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की, लेकिन विवादों और कथित अनियमितताओं के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया।

भूख हड़ताल पर बैठीं कुछ छात्राओं का आरोप है कि आयोग और भर्ती संस्थाएं उम्मीदवारों के साथ ईमानदार रवैया नहीं अपना रही हैं। वहीं कुछ छात्रों का कहना है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होती तो परिणाम अलग हो सकते थे।

गढ़वा, बोकारो, पलामू और अन्य जिलों से आए अभ्यर्थियों का कहना है कि वे केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि पूरे भर्ती तंत्र में सुधार की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों के बयानों में निराशा और आक्रोश दोनों दिखाई देते हैं, जो लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर युवाओं की चिंता को दर्शाता है।

रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम क्यों बना ‘झारखंड का जंतर-मंतर’?

आंदोलन स्थल का दृश्य इन दिनों काफी चर्चा में है। बड़ी संख्या में छात्र यहां लगातार डटे हुए हैं और अलग-अलग समूहों में अपनी मांगों को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठन और आम नागरिक भी आंदोलन को नैतिक समर्थन देने पहुंच रहे हैं।

हालांकि आंदोलन के दौरान अनुशासन बनाए रखने की भी कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना है।

यही कारण है कि कई लोग रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम की तुलना दिल्ली के जंतर-मंतर से कर रहे हैं। JPSC छात्र आंदोलन अब राज्य की राजनीति, प्रशासन और भर्ती व्यवस्था से जुड़ी बहस का केंद्र बन चुका है।

CID जांच और बढ़ते सवाल

झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर जांच एजेंसियां भी सक्रिय हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, JPSC परीक्षा से जुड़े मामले की जांच CID कर रही है।

जांच के दौरान JPSC से जुड़े कुछ कर्मियों और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL से जुड़े लोगों के पास छात्रों की OMR शीट और एडमिट कार्ड मिलने की बात सामने आई है। CID ने कुछ सफल अभ्यर्थियों से भी OMR शीट मांगी है।

मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई है। वहीं पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते से पूछताछ जारी रहने और उनका पासपोर्ट जब्त किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। जांच एजेंसियां उनके विदेश दौरों और संभावित संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।

इन घटनाक्रमों ने JPSC छात्र आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया है तथा छात्रों की मांगों को नई मजबूती प्रदान की है।

आगे क्या?

आंदोलनकारी छात्रों की मुख्य मांगें स्पष्ट हैं—14वीं JPSC परीक्षा रद्द की जाए, मामले की CBI जांच कराई जाए और भविष्य में निष्पक्ष एवं समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। फिलहाल छात्र अपने आंदोलन को जारी रखने के संकेत दे रहे हैं।

सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि छात्रों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। (Expose India)

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