
लखनऊ, जून 2025। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेशवासियों के लिए एक बेहद राहत भरी और श्रद्धा से जुड़ी घोषणा की है। अब कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने वाले उत्तर प्रदेश के मूल निवासी तीर्थयात्रियों को राज्य सरकार की ओर से ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह घोषणा राज्य के धर्मार्थ कार्य विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार ने की। उन्होंने बताया कि यह सहायता न केवल भारत सरकार की आधिकारिक यात्रा योजना के अंतर्गत जाने वाले यात्रियों को मिलेगी, बल्कि जो लोग निजी ट्रैवल एजेंसियों या अन्य स्रोतों से यात्रा करते हैं, वे भी इसके पात्र होंगे।
श्रद्धालुओं के लिए सहूलियत का मार्ग
कैलाश मानसरोवर यात्रा को हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और पुण्य यात्रा माना जाता है। इसे करने की अभिलाषा हर वर्ष लाखों श्रद्धालु रखते हैं, लेकिन इसकी कठिनाई और खर्च के कारण बहुत से लोग यह यात्रा नहीं कर पाते। उत्तर प्रदेश सरकार की इस घोषणा से न केवल धार्मिक भावना को बल मिलेगा, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग भी अब यह यात्रा कर सकेंगे।
इस योजना के तहत लाभ पाने के लिए तीर्थयात्रियों को यात्रा पूरी करने के 90 दिन के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन धर्मार्थ कार्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर किया जाएगा। इसके लिए कोई कागजी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, अर्थात पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से होगी।
आवेदन प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेज़
सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार, आवेदक को निम्नलिखित दस्तावेज़ ऑनलाइन अपलोड करने होंगे:
पासपोर्ट आकार की रंगीन फोटो
आधार कार्ड की प्रति
पैन कार्ड की प्रति
मूल निवास प्रमाण पत्र (उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त)
पासपोर्ट और वीजा की प्रति
बैंक खाता विवरण (जिसमें सहायता राशि ट्रांसफर की जा सके)
यात्रा पूरी होने का प्रमाण पत्र (जो संबंधित ट्रैवल एजेंसी या भारत सरकार से प्राप्त हो)
इन दस्तावेज़ों की सत्यता सुनिश्चित करने के बाद ही ₹1 लाख की सहायता राशि सीधे आवेदक के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। यह सहायता एक बार की यात्रा पर ही मान्य होगी।
आय सीमा नहीं, सभी को मिलेगा लाभ
इस योजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसमें कोई आय सीमा नहीं रखी गई है। यानी चाहे आवेदक सरकारी कर्मचारी हो, निजी कर्मचारी हो या किसी अन्य क्षेत्र से हो — यदि वह उत्तर प्रदेश का मूल निवासी है और उसने यात्रा पूरी की है, तो उसे यह लाभ मिलेगा। इसके साथ ही, यह सुविधा उन लोगों को भी मिलेगी जो निजी ट्रैवल एजेंसियों की मदद से कैलाश मानसरोवर की यात्रा करते हैं।
यह योजना राज्य सरकार द्वारा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और नागरिकों की धार्मिक आस्था का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
राज्य सरकार का उद्देश्य
धर्मार्थ कार्य विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि हर वह श्रद्धालु जो आस्था के साथ कैलाश मानसरोवर की कठिन यात्रा करता है, उसकी तपस्या और प्रयास को सम्मान मिले। यही कारण है कि राज्य सरकार ने न केवल आर्थिक सहायता की घोषणा की है, बल्कि प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए इसे पूरी तरह ऑनलाइन किया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में कुल 317 तीर्थयात्रियों ने यह यात्रा पूरी की थी, जिनमें से 176 लोग निजी माध्यमों से गए थे। राज्य सरकार की योजना है कि वर्ष 2025 से यह संख्या बढ़े और अधिक से अधिक लोग इस यात्रा को कर सकें।
कैलाश मानसरोवर यात्रा की कठिनाई और पवित्रता
कैलाश पर्वत, जो तिब्बत में स्थित है, को भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है। इसके पास स्थित मानसरोवर झील को पवित्रता और मोक्ष का प्रतीक माना गया है। यह यात्रा न केवल शारीरिक रूप से कठिन होती है, बल्कि मानसिक रूप से भी एक चुनौती होती है। उच्च पर्वतीय क्षेत्रों, अत्यधिक ठंड, ऑक्सीजन की कमी और जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हर वर्ष हजारों लोग इस यात्रा के लिए आवेदन करते हैं।सरकार का यह प्रयास उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है जो आर्थिक कारणों से अब तक इस यात्रा को नहीं कर पाए थे।
यात्रा एजेंसियों की भूमिका
प्रमुख सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा पूरी करने का प्रमाण पत्र केवल वही एजेंसियां जारी कर सकती हैं, जिन्हें भारत सरकार या संबंधित अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा अधिकृत किया गया है। किसी भी फर्जी दस्तावेज़ या गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। धर्मार्थ कार्य विभाग निकट भविष्य में अन्य धार्मिक यात्राओं जैसे अमरनाथ यात्रा, चारधाम यात्रा, वैष्णो देवी यात्रा आदि के लिए भी इसी तरह की आर्थिक सहायता योजना पर विचार कर रहा है। इसके लिए राज्य के धार्मिक पर्यटन बजट में विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना धार्मिक आस्था से जुड़े नागरिकों के लिए न केवल आर्थिक सहारा है, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक सम्मान भी है। यह पहल न केवल धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को एक ‘धार्मिक रूप से संवेदनशील और सहयोगी राज्य’ के रूप में प्रस्तुत भी करेगी।