मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान रस्तोगी और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा

पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, सजा सुनते ही दोनों फूट-फूटकर रोए



मेरठ। नीला ड्रम हत्याकांड में कोर्ट ने गुरुवार को ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाया। मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को पति सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सजा सुनते ही दोनों आरोपी फूट-फूटकर रोने लगे। अदालत के इस फैसले ने पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
यह हत्याकांड मेरठ की उन घटनाओं में शामिल है जिन्हें लोगों ने बेहद क्रूर और सुनियोजित बताया था। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव के पांच टुकड़े कर नीले ड्रम में भरकर सीमेंट का घोल डाल दिया गया था, ताकि सबूत पूरी तरह मिट जाएं। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
जज ने मुस्कान से पूछा—क्या सजा चाहती हो?
सजा सुनाने से पहले जज ने मुस्कान रस्तोगी से सीधा सवाल किया, “पति की हत्या में दोषी हो, क्या सजा चाहती हो?”
मुस्कान कुछ पल चुप रही, फिर धीमी आवाज में बोली—“मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह पूरी तरह खामोश हो गईं। उनकी आंखों में आंसू थे और वह बार-बार अपने चेहरे को छिपाने की कोशिश कर रही थीं।
जज ने साहिल से भी यही सवाल किया। साहिल सिर झुकाए बैठा रहा और कुछ नहीं बोला। उसकी खामोशी ने अदालत में मौजूद लोगों को और भी प्रभावित किया। दोनों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जुड़े थे। सजा का ऐलान होते ही दोनों का चेहरा पीला पड़ गया और वे जोर-जोर से रोने लगे।
सौरभ राजपूत की मां रो पड़ीं, बोलीं—न्याय मिल गया
फांसी की सजा के ऐलान के बाद सौरभ राजपूत की मां का दिल नहीं रहा। वे अदालत परिसर में रो पड़ीं। आंसू पोंछते हुए उन्होंने कहा—“शांति से न्याय मिल गया। मेरे बेटे की आत्मा को अब शांति मिलेगी। इतने दिन बाद सही फैसला आया है।”
सौरभ की मां ने बताया कि परिवार लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहा था। उन्होंने कहा कि बेटे की हत्या इतनी क्रूर तरीके से हुई कि परिवार कभी भी इस सदमे से बाहर नहीं निकल पाया।
कैसे हुई थी यह घटना? सबूत मिटाने की योजना
मामले की जांच में सामने आया था कि मुस्कान रस्तोगी और साहिल के बीच अवैध संबंध चल रहे थे। सौरभ राजपूत को इस बात का आभास हो गया था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और एक दिन दोनों आरोपियों ने सौरभ की हत्या की साजिश रची।
हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव के पांच टुकड़े किए गए। इन टुकड़ों को एक बड़े नीले ड्रम में रखा गया और उसमें सीमेंट का घोल डाल दिया गया। इस तरीके से आरोपी शव को पूरी तरह नष्ट करना चाहते थे, ताकि पुलिस को कोई ठोस सबूत न मिल सके। लेकिन पुलिस की गहन जांच और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर दोनों का अपराध साबित हो गया।
नीला ड्रम हत्याकांड मेरठ में चर्चा का विषय बन गया था। लोगों ने इसे बेहद क्रूर और सुनियोजित हत्या बताया। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर काफी चर्चा हुई थी। कई लोगों ने मांग की थी कि आरोपियों को कठोर से कठोर सजा दी जाए।
कोर्ट की कार्यवाही और फैसला
अदालत में दोनों आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था। अभियोजन पक्ष ने मजबूत सबूत पेश किए। गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों ने मुस्कान और साहिल के खिलाफ मामला मजबूत किया। बचाव पक्ष ने कई दलीलें दीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें पर्याप्त नहीं माना।
जज ने अपने फैसले में कहा कि यह हत्या सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ एक गंभीर अपराध है। शव को टुकड़े-टुकड़े कर नीले ड्रम में भरना और सीमेंट डालना साफ तौर पर सबूत मिटाने की कोशिश थी। ऐसे मामलों में समाज को सही संदेश देने के लिए कठोर सजा जरूरी है। इसी आधार पर दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई।
परिवार और समाज की प्रतिक्रिया
सौरभ राजपूत के परिवार ने फैसले का स्वागत किया है। परिवार के सदस्यों ने कहा कि इतने लंबे समय बाद न्याय मिला है। सौरभ की मां ने कहा कि वे अब शांत हैं क्योंकि उनके बेटे को इंसाफ मिल गया।
मेरठ के कई नागरिकों ने भी इस फैसले की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऐसे क्रूर अपराधों में फांसी जैसी सजा ही सही संदेश देती है।
वहीं कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि मृत्युदंड के मामलों में अपील की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। दोनों आरोपी उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। लेकिन फिलहाल कोर्ट का फैसला साफ है—दोनों को फांसी।
मुस्कान की बच्चियों का भविष्य
मुस्कान ने अदालत में अपनी बच्चियों का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी बच्चियों का ख्याल रखा जाए। इस बात ने कई लोगों के दिल को छुआ। सवाल उठ रहे हैं कि अब इन बच्चियों का भविष्य क्या होगा। परिवार और समाज दोनों को इस दिशा में संवेदनशीलता दिखानी होगी।