
लखनऊ, (अमर भारती) कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सुल्तानपुर जाते समय उनके काफिले में शामिल गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हादसा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर 89.5 माइलस्टोन के पास हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे में कांग्रेस के कई कार्यकर्ता घायल हुए हैं। राहुल गांधी सुरक्षित बताए गए हैं। हादसे के बाद वह सुल्तानपुर स्थित एमपी-एमएलए अदालत में पेश होने के लिए रवाना हुए। यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े कथित मानहानि मामले में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही सुनवाई में सोमवार को फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।
राहुल गांधी सोमवार सुबह दिल्ली से लखनऊ पहुंचे थे। लखनऊ एयरपोर्ट पर वह मीडिया से बातचीत किए बिना सुल्तानपुर के लिए रवाना हो गए। इसी दौरान पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर उनके काफिले की गाड़ियां आपस में टकरा गईं। शुरुआती रिपोर्टों में हादसे की वजह तेज रफ्तार बताई गई है। हालांकि, दुर्घटना के कारणों और घायलों की स्थिति के संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा है मामला
राहुल गांधी के खिलाफ यह मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा की शिकायत पर अगस्त 2018 में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, राहुल गांधी ने 8 मई 2018 को कर्नाटक के बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी। आरोप है कि उन्होंने कहा था कि जो पार्टी ईमानदारी और शुचिता की बात करती है, उसके अध्यक्ष पर हत्या का आरोप है।
शिकायतकर्ता ने इस टिप्पणी को अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया था। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत आरोप लगाए गए हैं। धारा 499 मानहानि से संबंधित है, जबकि धारा 500 में इसके लिए सजा का प्रावधान है। दोष सिद्ध होने पर अधिकतम दो वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों की सजा हो सकती है। हालांकि, किसी आरोपी को सजा तभी दी जा सकती है, जब अदालत आरोपों को कानूनी रूप से साबित मानते हुए दोषसिद्धि का फैसला सुनाए।
2023 में अदालत ने किया था तलब
सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को इस मामले में तलब किया था। इसके बाद वह 20 फरवरी 2024 को अदालत में पेश हुए थे और उन्हें जमानत मिली थी। जमानत के लिए 25-25 हजार रुपये के दो जमानतदार पेश किए गए थे।
मामले में राहुल गांधी का बयान 26 जुलाई 2024 को दर्ज किया गया था। इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों के संबंध में अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। इसके बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब प्रकरण निर्णय के चरण में पहुंचने की बात कही जा रही है।
वॉइस सैंपल के मिलान की मांग भी खारिज
मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत में एक सीडी पेश की थी। इसमें मौजूद आवाज का राहुल गांधी के वॉइस सैंपल से फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) के जरिए मिलान कराने की मांग की गई थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ट्रायल कोर्ट ने 2 मई 2026 को इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष ने सेशन कोर्ट में अर्जी दाखिल की, जिसे 15 जुलाई 2026 को खारिज कर दिया गया। बाद में इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने और सितंबर 2026 में वॉइस सैंपल से संबंधित याचिका की चर्चा सामने आई। इसके बाद मामले में अंतिम बहस की कार्यवाही आगे बढ़ी।
वकील बोले—राहुल गांधी को मिलेगा न्याय
राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने कहा कि मुकदमा एमपी-एमएलए अदालत में निर्णय के लिए सूचीबद्ध है। उन्होंने कहा कि लंबे इंतजार के बाद मामले में फैसला आने का समय आया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि राहुल गांधी को न्याय मिलेगा तथा वह बाइज्जत बरी होंगे।
फिलहाल अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं। हालांकि, फैसला सुनाए जाने की अंतिम स्थिति और उसका परिणाम अदालत के आधिकारिक आदेश से ही स्पष्ट होगा।
सोहराबुद्दीन मामले का भी आया था संदर्भ
शिकायत में अमित शाह के नाम का संबंध वर्ष 2005 के सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले से जुड़े संदर्भ में उठाया गया था। हालांकि, मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने वर्ष 2014 में अमित शाह को इस मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया था। इसलिए इस मामले का उल्लेख करते समय आरोपों और अदालत के फैसले के बीच अंतर करना जरूरी है।
राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मानहानि मुकदमे में अब अदालत का निर्णय महत्वपूर्ण होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि शिकायतकर्ता के आरोपों और राहुल गांधी के बचाव में पेश दलीलों पर अदालत का क्या निष्कर्ष है।