‘विंग्स ओवर गंगा’: छह लड़ाकू विमानों की एरोहेड फॉर्मेशन बनी आकर्षण

डिजिटल डेस्क, अमर भारती। गंगा के तट पर लड़ाकू विमानों की गूंज और आसमान में भारतीय वायु सेना के हैरतअंगेज करतब देखने को मिले। वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे। राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस और मिग-29 समेत छह लड़ाकू विमानों ने एक साथ एरोहेड फॉर्मेशन में उड़ान भरकर अपनी ताकत और पायलटों के कौशल का प्रदर्शन किया।
नमो घाट पर एयर शो, प्रधानमंत्री मोदी भी पहुंचे
वाराणसी में आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो भारतीय वायु सेना के 94वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम का हिस्सा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोड शो करते हुए नमो घाट पहुंचे और वहां हवाई प्रदर्शन देखा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, वायु सेना प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस आयोजन में लड़ाकू विमानों की उड़ान के साथ आधुनिक सैन्य तकनीक, हवाई युद्ध के अभ्यास और अलग-अलग सैन्य इकाइयों के बीच तालमेल की झलक दिखाई गई।
छह लड़ाकू विमानों की एरोहेड फॉर्मेशन बनी आकर्षण
एयर शो का प्रमुख आकर्षण छह लड़ाकू विमानों का एक साथ एरोहेड फॉर्मेशन में उड़ना रहा। इस फॉर्मेशन में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 शामिल थे।

एक ही फॉर्मेशन में अलग-अलग लड़ाकू विमानों को उड़ते देखना प्रदर्शन का खास हिस्सा रहा। इसमें विमानों की गति, निर्धारित फॉर्मेशन बनाए रखने और पायलटों के आपसी तालमेल का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में वास्तविक हथियारों के साथ उड़ान भरने वाले विमान भी शामिल रहे।
गंगा के ऊपर हवाई युद्ध का सिमुलेशन
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों को हवाई युद्ध की रणनीति का अभ्यास भी दिखाया गया। दो जगुआर विमानों ने मालवीय पुल के ऊपर तेज गति से हमले का अभ्यास किया। इसी दौरान सुखोई-30 एमकेआई ने उन्हें रोकने के लिए इंटरसेप्शन का अभ्यास किया।
इस प्रदर्शन के जरिए दिखाया गया कि संभावित हवाई खतरे का सामना करते समय लड़ाकू विमान किस तरह कार्रवाई करते हैं और मिशन के दौरान उनके बीच तालमेल किस तरह काम करता है।
8,000 फीट की ऊंचाई से रिकॉर्ड हुआ सुखोई का करतब
सुखोई-30 एमकेआई का तेज गति वाला वर्टिकल मैन्यूवर भी एयर शो के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। एक सुखोई ने दर्शकों के सामने यह करतब दिखाया, जबकि दूसरे विमान ने लगभग 8,000 फीट की ऊंचाई से इन्फ्रारेड इमेजिंग पॉड की मदद से प्रदर्शन को रिकॉर्ड किया।
इस अभ्यास में लड़ाकू विमान की उड़ान क्षमता के साथ इमेजिंग और सेंसर तकनीक का इस्तेमाल भी सामने आया।
12 एयरबेस से करीब 100 विमानों की भागीदारी
इस हवाई प्रदर्शन के लिए देश के 12 एयरबेस से करीब 100 विमानों की भागीदारी निर्धारित की गई थी। इनमें लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और परिवहन विमान शामिल थे।
कार्यक्रम में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच संयुक्त तालमेल भी दिखाया गया। इसका उद्देश्य अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय और संयुक्त परिचालन क्षमता को सामने लाना था।
नौसेना के P-8I और मिराज-2000 ने भी लिया हिस्सा
एयर शो में भारतीय नौसेना के P-8I समुद्री निगरानी विमान ने भी भाग लिया। दी गई जानकारी के मुताबिक, इस विमान ने चेन्नई के पास अरक्कोनम से उड़ान भरी, ग्वालियर के ऊपर मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के साथ तालमेल किया और फिर वाराणसी में प्रदर्शन का हिस्सा बना।
यह गतिविधि अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म के बीच समन्वय को प्रदर्शित करने वाले कार्यक्रम का हिस्सा थी।

सूर्य किरण और सारंग के करतबों के साथ समापन
‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का समापन भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन के साथ हुआ। सूर्य किरण टीम ने विमानों के सटीक फॉर्मेशन और हवाई करतब दिखाए, जबकि सारंग टीम ने हेलीकॉप्टरों के जरिए उड़ान क्षमता और तालमेल का प्रदर्शन किया।
वाराणसी के नमो घाट पर हुए इस आयोजन में लड़ाकू विमानों की फॉर्मेशन, हवाई युद्ध का सिमुलेशन और एरोबैटिक टीमों के करतब प्रमुख आकर्षण रहे। कार्यक्रम के जरिए भारतीय वायु सेना की तकनीकी क्षमताओं और सैन्य समन्वय की झलक पेश की गई। (Expose India)
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