
नई दिल्ली। इंडिया गंठबंधन दल के नेता एक बार फिर विपक्षी गठबंधन को धार देने की कोशिशों में जुट गए हैं. दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में 23 दलों के 34 नेता इस बैठक में शामिल हुए. दोपहर 12 बजे शुरू हुई बैठक करीब ढाई घंटे तक चली जिसमें सभी ने एकजुट होकर एक रणनीति पर चलने के लिए सहमति बनाई.
बैठक की वजह
यह बैठक हाल ही में संपन्न हुए चार राज्यों और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद हुई है। जहां कुछ राज्यों में विपक्ष को सफलता मिली, वहीं पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया। ममता बनर्जी, जिनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में हार का सामना कर रही है, विपक्षी एकता को नई दिशा देने के प्रयास में सक्रिय दिख रही हैं। टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी के आग्रह पर ही इस बैठक को बुलाया गया था.
बैठक के खास बिंदु
इंडिया दल के सभी नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति जताई. बैठक में नीट और सीबीएसई से जुड़े विवादों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की गई. इंडिया ब्लॉक ने नियमित अंतराल पर बैठकें करने का फैसला लिया.
प्रमुख नेता उपस्थित
बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला, सुप्रिया सुले और महबूबा मुफ्ती समेत 34 नेता और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मल्लिकार्जुन खरगे ने सभी नेताओं का स्वागत करते हुए बैठक की कार्यवाही शुरू की। इंडिया ब्लॉक में शामिल प्रमुख दलों के नेता दोपहर 3 बजे जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी शामिल हुए.
DMK और AAP ने बनाई दूरी
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने बैठक का बहिष्कार किया। तमिलनाडु चुनावों के बाद DMK ने कांग्रेस पर गठबंधन की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। आम आदमी पार्टी (AAP) भी इस बैठक में शामिल नहीं हुई।
राहुल गांधी पर पोस्टर प्रकरण
बैठक से ठीक पहले दिल्ली के प्रमुख चौराहों पर राहुल गांधी के खिलाफ पुराने बयानों वाले पोस्टर लगाए गए, जिसमें गठबंधन के कुछ सहयोगी दलों के पूर्व बयान शामिल थे। इस घटना ने गठबंधन के भीतर मौजूद असहमति को एक बार फिर रेखांकित किया।
डीएमके की दूरी, ममता का स्वार्थ
बैठक के समापन पर विपक्षी नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आगामी चुनावों में एकजुट होकर लड़ने का संकल्प दोहराया। हालांकि पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हार पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया था जिसको लेकर राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं को समझाया भी था. ऐसे में ममता और राहुल के रिश्तों में बीच स्वार्थ की एक दीवार भी खड़ी है.
देखना यह होगा कि डीएमके और अरविंद केजरीवाल इंडिया गठबंधन से दूरी बनाकर क्या हासिल कर पाते हैं, देखा जाए तो ममता का राहुल से मिलकर अन्य दलों से मिलने का आग्रह कांग्रेस की मज़बूती के संकेत हैं और ममता के बैकफुट पर जाने के. ऐसे में राहुल गांधी भला हारे हुए घोड़े पर दांव क्यों लगाएंगे, यह समझना होगा.