बंगाल गया… क्या अब दिल्ली का भी रास्ता ममता का होगा बंद, टीएमसी के पतन का अंत दिख रहा निकट, 14 सांसदों ने शुभेंदु से की मुलाकात?

TMC internal crisis, Trinamool Congress controversy, TMC MPs meeting Delhi,
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नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी तनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर दिल्ली में हुई हालिया गतिविधियों ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है। अलग-अलग राजनीतिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के 14 सांसदों के एक समूह ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। इस मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार बैठक से अलग मानते हुए राजनीतिक हलकों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।

दिल्ली में लगातार हो रही राजनीतिक बैठकें

सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात किसी एक बैठक तक सीमित नहीं रही, बल्कि दिल्ली में कई स्तरों पर राजनीतिक संवाद देखने को मिला है। बताया जा रहा है कि इस दौरान पश्चिम बंगाल के विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी भी दिल्ली पहुंचे थे। वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एक ही समय में विभिन्न दलों के नेताओं की ऐसी मुलाकातें अक्सर किसी बड़े राजनीतिक संकेत की ओर इशारा करती हैं, हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने इसे औपचारिक राजनीतिक गठजोड़ के रूप में स्वीकार नहीं किया है।

सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे से बढ़ी चर्चा

इसी बीच राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे ने टीएमसी के भीतर असंतोष की चर्चाओं को और मजबूत कर दिया है। उन्होंने राज्यसभा सदस्यता के साथ-साथ पार्टी के सभी पदों से भी इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद दिल्ली में उनसे मिलने के लिए टीएमसी के पांच सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचा। इन सांसदों में बर्दमान पूर्व से शर्मिला सरकार, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, कूचबिहार से जगदीश बसुनिया, झारग्राम से कालिपद सोरेन और बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती शामिल बताए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इन मुलाकातों को पार्टी के भीतर संवाद की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

अलग-अलग स्रोतों में सामने आईं अलग-अलग तस्वीरें

विभिन्न रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषणों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। कुछ सूत्र इसे टीएमसी के भीतर बढ़ती असहमति और नेतृत्व से असंतोष के संकेत के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ अन्य इसे सामान्य राजनीतिक संपर्क और रणनीतिक चर्चा बता रहे हैं। इसी बीच, बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों से जुड़े सूत्र इसे पश्चिम बंगाल की राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं। हालांकि टीएमसी की ओर से अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे अटकलों को और बल मिला है।

सुखेंदु शेखर राय का बयान और राजनीतिक संदेश

इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर राय ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और विकास के कई मोर्चों पर गिरावट देखी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं का भरोसा पार्टी से कम हुआ है और जनता ने विभिन्न मुद्दों पर असंतोष व्यक्त किया है। हालांकि उनके इन बयानों को लेकर भी राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं। टीएमसी समर्थक इसे व्यक्तिगत राय बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे पार्टी के भीतर गहराते संकट के संकेत के रूप में पेश कर रहा है।

आगे की राजनीतिक दिशा पर नजर

फिलहाल दिल्ली में हुई इन बैठकों और इस्तीफों के बाद टीएमसी की आंतरिक राजनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी नेताओं के बयान और गतिविधियां इस स्थिति को और स्पष्ट कर सकती हैं। फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह घटनाक्रम किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत है या केवल पार्टी के भीतर चल रही सामान्य असहमति का हिस्सा है।

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