परिसीमन विधेयक पर फिर घमासान की तैयारी, 22 DMK सांसदों पर टिकी नजर, क्या स्टालिन तय करेंगे बिल का भविष्य?

संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिनों में परिसीमन विधेयक पर सियासत तेज है। NDA के संख्या बल के बीच DMK के 22 सांसदों की भूमिका सबसे अहम हो गई है।

परिसीमन विधेयक को लेकर संसद में DMK और NDA के बीच सियासी घमासान
परिसीमन विधेयक पर संख्या बल के बीच DMK के 22 सांसदों की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

नई दिल्ली/अमर भारती। संसद के मानसून सत्र के आखिरी चार दिनों में परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। लोकसभा में संख्या बल जुटाने की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की कोशिशों के बीच द्रमुक (DMK) के 22 सांसद इस पूरे राजनीतिक समीकरण में सबसे अहम हो गए हैं। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में टूट के बाद बदले संख्या बल ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए द्रमुक की भूमिका को निर्णायक बना दिया है।

हालांकि, विपक्ष के लिए एनसीपी-एसपी का इंडिया गठबंधन के साथ बने रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में मानसून सत्र के बचे हुए दिन सरकार और विपक्ष, दोनों के लिए राजनीतिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।

परिसीमन विधेयक पर DMK ने नहीं खोले पत्ते

परिसीमन विधेयक को लेकर पर्दे के पीछे राजनीतिक बातचीत तेज है, लेकिन द्रमुक ने अभी तक अपने रुख का स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। यही वजह मानी जा रही है कि सरकार ने फिलहाल विधेयक को सोमवार की लोकसभा या राज्यसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं किया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू लगातार महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए परिसीमन की जरूरत का तर्क देते हुए विपक्षी दलों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि किसी तरह आवश्यक संख्या जुटाकर संविधान संशोधन से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में आगे बढ़ाया जा सके।

क्यों महत्वपूर्ण हैं द्रमुक के 22 सांसद?

मौजूदा राजनीतिक समीकरण में द्रमुक के 22 लोकसभा सांसद बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। विपक्ष से दूरी बनने की स्थिति में सरकार के लिए बहुमत का गणित आसान हो सकता है, जबकि द्रमुक के विपक्ष के साथ रहने पर परिसीमन विधेयक को पारित कराने की सरकार की चुनौती बढ़ जाएगी।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस से गठबंधन संबंधों में बदलाव के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का फिलहाल ज्यादा ध्यान राज्य की राजनीति और आगामी चुनावी रणनीति पर है। यही स्थिति केंद्र सरकार के लिए द्रमुक को अपने पक्ष में लाने की संभावना तलाशने का आधार बन रही है।

लोकसभा में NDA का संख्या बल कितना?

ताजा राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक लोकसभा में NDA का संख्या बल करीब 326 सांसदों तक पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस में टूट के बाद कुछ सांसदों के सत्ता पक्ष के साथ आने और शिवसेना (यूबीटी) से अलग हुए सांसदों के NDA खेमे में जाने से सरकार की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है।

इसके अलावा वाईएसआर कांग्रेस के सांसदों और कुछ निर्दलीय सदस्यों के समर्थन से सत्ता पक्ष का संभावित संख्या बल और बढ़ जाता है। शिरोमणि अकाली दल के एक सांसद ने भी परिसीमन विधेयक मुद्दे पर सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है।

दो-तिहाई बहुमत के लिए चाहिए 350 से ज्यादा वोट

परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन को पारित कराने के लिए सरकार को सामान्य बहुमत से ज्यादा समर्थन की जरूरत होगी। संविधान संशोधन विधेयक के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।

पिछली बार सरकार को करीब 298 सांसदों का समर्थन मिला था, जो आवश्यक संख्या से कम था। मौजूदा सदन में तीन सीटें रिक्त होने के कारण प्रभावी सदस्य संख्या 540 के आसपास है। ऐसे में मतदान के दौरान उपस्थिति के आधार पर सरकार को लगभग 350-360 सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि द्रमुक के 22 सांसदों का रुख सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विपक्ष के सामने भी बड़ी चुनौती

दूसरी ओर, परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्षी इंडिया गठबंधन के सामने भी एकजुटता बनाए रखने की चुनौती है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में टूट के बाद विपक्ष का संख्या बल पहले की तुलना में कम हुआ है। बताया जा रहा है कि द्रमुक के विपक्षी खेमे से अलग होने की स्थिति में सरकार के खिलाफ संख्या जुटाना और मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में कांग्रेस समेत विपक्षी दल भी एमके स्टालिन के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। एनसीपी-एसपी का इंडिया गठबंधन के साथ बने रहना भी विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए संसद के बचे हुए दिनों में दोनों खेमों की राजनीतिक सक्रियता बढ़ने की संभावना है।

सोमवार को कई अहम विधेयक होंगे पेश

मानसून सत्र के अंतिम दिनों में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। लोकसभा में न्यायाधिकरण सुधार विधेयक-2026, खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक-2026, केरल (नाम में बदलाव) विधेयक-2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक-2026 पेश किए जाने हैं। वहीं, राज्यसभा में बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026 पर चर्चा प्रस्तावित है। इसके अलावा कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक-2026 पर भी उच्च सदन में विचार होना है।

ऐसे में संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन सिर्फ विधायी कामकाज ही नहीं, बल्कि परिसीमन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर भी सबकी नजर रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि द्रमुक के 22 सांसद किस खेमे के साथ खड़े होते हैं।

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