अमेरिकी वित्त मंत्री की चेतावनी के बाद ईरानी एयरलाइंस और उन्हें सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों पर प्रतिबंध का खतरा बढ़ गया है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी एयरलाइंस पर आर्थिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने चेतावनी दी है कि इस सप्ताह से ईरानी एयरलाइंस का अंतरराष्ट्रीय संचालन पूरी तरह ठप हो सकता है। वाशिंगटन ने विदेशी कंपनियों को भी आगाह किया है कि यदि उन्होंने ईरानी विमानन कंपनियों को सेवाएं देना जारी रखा, तो उनके खिलाफ कड़े सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
ईरानी एयरलाइंस पर अमेरिकी प्रतिबंध का खतरा
स्कॉट बेसेन्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ईरानी एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय संचालन को रोकने के लिए आर्थिक दबाव का इस्तेमाल कर रहा है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई केवल ईरानी विमानन कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन विदेशी कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है जो इन एयरलाइंस के संचालन में किसी तरह की मदद करती हैं।
इसमें एयरपोर्ट, टिकटिंग एजेंसियां, ईंधन आपूर्तिकर्ता और ग्राउंड हैंडलिंग कंपनियां शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का संदेश है कि ईरानी एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालन के लिए जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
डॉलर सिस्टम से बाहर करने की चेतावनी
बेसेन्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विदेशी कंपनियां ईरानी एयरलाइंस को ईंधन, लैंडिंग सेवाएं या टिकटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय डॉलर प्रणाली से बाहर किए जाने का खतरा हो सकता है।
अमेरिका की यह रणनीति ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक नीति का हिस्सा बताई गई है। बेसेन्ट ने संकेत दिया है कि 23 सितंबर तक ईरानी एयरलाइंस को प्रभावी रूप से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से बाहर किया जा सकता है।
कई देशों ने ईरानी उड़ानों पर शुरू की कार्रवाई
अमेरिकी चेतावनी के बीच कई देशों की ओर से भीईरानी एयरलाइंस को लेकर कदम उठाए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इराक में ईरानी एयरलाइंस की उड़ानों को निलंबित करने की तैयारी की जा रही है।
वहीं जॉर्जिया ने ईरानी विमानों के अपने क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगा दी है। ईरान की महान एयर ने भी बताया है कि तुर्की सरकार के अनुरोध के बाद उसने तुर्की के लिए अपनी सेवाएं रोक दी हैं।
पहले से मुश्किल दौर में ईरानी विमानन क्षेत्र
ईरानी एयरलाइंस का विमानन क्षेत्र पहले से ही लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों की वजह से मुश्किलों का सामना कर रहा है। विमान खरीदने, स्पेयर पार्ट्स हासिल करने और रखरखाव सेवाओं की उपलब्धता पर प्रतिबंधों का असर बताया जाता रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन पर नए दबाव से ईरानी एयरलाइंस के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
चीन के साथ कूटनीतिक बातचीत के संकेत
बेसेन्ट की टिप्पणी चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग के साथ उच्चस्तरीय आर्थिक वार्ता के एक दिन बाद आई। चीन ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों और कूटनीतिक समर्थकों में शामिल है। ऐसे में अमेरिका की ईरान नीति और चीन के साथ उसके आर्थिक संवाद के बीच भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर विमानन के साथ ऊर्जा और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ रहा है। ईरान की ओर से होर्मुज मार्ग को बाधित किए जाने के बाद वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर दबाव बढ़ने की बात सामने आई थी। इसके बाद अमेरिका ने ईरानी विमानन क्षेत्र और उसे विदेशों से समर्थन देने वाली कंपनियों पर आर्थिक दबाव और बढ़ाया है।
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