
रिपोर्ट-दिलीप कुमार यादव
मथुरा। बाकलपुर इंद्रपुरी की 112 वर्षीय अम्मा रम्मूली देवी का सोमवार को वृद्धावस्था पेंशन के लिए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन दिन के भीतर उनकी पेंशन बंधवाने के निर्देश दिए, लेकिन इस घटना ने सरकारी तंत्र की लचर व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचकर अम्मा को भले ही पेंशन मिल जाए, लेकिन पिछले 50 वर्षों तक उन्हें उनके हक से वंचित रखने के लिए जिम्मेदार कौन है, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है।
जानकारों का कहना है कि यह केवल एक अम्मा की कहानी नहीं, बल्कि लगभग हर गांव और मोहल्ले की हकीकत है। हर इलाके में सैकड़ों उम्रदराज चाची, ताई और अम्माएं ऐसी हैं जो पेंशन बंधवाने या बंधने के बाद बंद हो जाने की समस्याओं से जूझती रहती हैं। सरकारी योजनाएं गरीब और बुजुर्ग लोगों के जीवन-यापन का बड़ा सहारा मानी जाती हैं, लेकिन इन योजनाओं तक पहुंच बनाना आम लोगों के लिए आसान नहीं है।
गांवों में अक्सर यह काम दलालों के माध्यम से ही कराया जाता है, क्योंकि विभागीय अधिकारियों और दफ्तरों तक आम लोगों की सीधी पहुंच नहीं हो पाती। विशेषकर बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया और भी अधिक कठिन हो जाती है। जन सेवा केंद्रों पर भी लोगों को निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे देने पड़ते हैं। हालांकि वहां काम करने वाले लोग भी यह तर्क देते हैं कि फॉर्म भरना, दस्तावेज डाउनलोड करना और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं में समय और मेहनत लगती है, जिसे तय सरकारी शुल्क में करना संभव नहीं होता।
नियमों के अनुसार 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। लेकिन अम्मा रम्मूली देवी के जीवन के 52 वर्ष बिना पेंशन के ही गुजर गए। यदि समय पर उन्हें पेंशन मिलती तो यह राशि उनके जीवन को कुछ हद तक अधिक सहज और सम्मानजनक बना सकती थी।
अब जब जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद उनकी पेंशन बंधने जा रही है, तब यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इतने वर्षों तक व्यवस्था ने उनकी सुध क्यों नहीं ली। दुर्भाग्य यह है कि इतने लंबे समय बाद अब उन जिम्मेदार लोगों की पहचान करना और उन्हें जवाबदेह ठहराना भी लगभग असंभव हो चुका है।
अम्मा की यह कहानी केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि उस तंत्र की तस्वीर है जिसमें सरकारी योजनाएं तो बन जाती हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर तक उनका लाभ पहुंचाने में अभी भी कई कमियां मौजूद हैं।