अड़ींग ग्राम पंचायत में संकट: 13 सदस्यों के इस्तीफे को एक माह, न जांच न प्रशासक नियुक्ति

मथुरा। गोवर्धन क्षेत्र की अड़ींग ग्राम पंचायत में प्रशासनिक सुस्ती के चलते हालात चिंताजनक बने हुए हैं। पंचायत के 12 सदस्यों द्वारा दिए गए सामूहिक त्यागपत्रों को एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो शासनादेश का पालन हुआ है और न ही किसी प्रकार की जांच शुरू की गई है।
पंचायत राज विभाग की ओर से अभी तक प्रशासक की नियुक्ति नहीं की गई है। वहीं, यदि इस्तीफों का सत्यापन आवश्यक माना जा रहा है तो उस दिशा में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे पंचायत के विकास कार्य प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
बताया गया कि अड़ींग पंचायत के सदस्यों ने रोजगार सेवक पर आरोप लगाते हुए 16 फरवरी को पंचायत सचिव को अपने सामूहिक त्यागपत्र सौंप दिए थे। आरोप है कि रोजगार सेवक ने सरकारी ऐप ‘मेरी पंचायत’ पर 14 सदस्यों के नाम के आगे पूरे कार्यकाल में अपना मोबाइल नंबर दर्ज कर रखा था और सदस्यों की लगातार उपेक्षा की जा रही थी।
19 फरवरी को ये इस्तीफे बीडीओ गोवर्धन कार्यालय में प्राप्त हुए और इसके बाद डीपीआरओ कार्यालय भी भेज दिए गए। सदस्यों ने रोजगार सेवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की थी, लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब सदस्य स्वयं एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
पंचायती राज अधिनियम 1947 की धारा 60 के तहत सचिव की संस्तुति के साथ इस्तीफे भेजे जाने पर पद रिक्त माने जाते हैं। वर्तमान में पंचायत के कुल 15 में से 13 सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं, जिनमें 12 ने सामूहिक रूप से और एक सदस्य ने रजिस्ट्री के माध्यम से त्यागपत्र भेजा है।
एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अधिकारी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं। इस बीच करोड़ों रुपये के बिल लंबित पड़े हैं और इस्तीफों के बाद से पंचायत में धन निकासी भी ठप हो गई है। सदस्यों को मनाने के प्रयास जारी हैं, जबकि एक सदस्य का पद पर बने रहने का वीडियो भी वायरल किया गया है।
अब देखना यह होगा कि पंचायत राज विभाग कब तक अपनी कार्यवाही पूरी करता है और इस पूरे मामले का क्या परिणाम निकलता है।