लखनऊ में कर्मचारी संगठनों की अहम बैठक: सरकार की उपेक्षा पर जताया आक्रोश

लखनऊ। लखनऊ के हजरतगंज स्थित डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ भवन (लोक निर्माण विभाग) में शनिवार देर शाम विभिन्न कर्मचारी संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का आवाहन उत्तर प्रदेश कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील त्रिपाठी ने किया और उनके संयोजन में यह बैठक देर रात तक चली। इसमें प्रदेश के कई प्रमुख कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपनी-अपनी बात रखी और वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा की।

बैठक को संबोधित करते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी, उत्तर प्रदेश राज्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रामराज दूबे और महामंत्री सुरेश सिंह यादव, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री गिरीश मिश्र, स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र, राज्य कर्मचारी महासंघ (डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ) के प्रदेश अध्यक्ष कमल अग्रवाल सहित कई अन्य पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

इसके अलावा जेपी पांडेय, भारत सिंह यादव, अजीत उपाध्याय, नरेंद्र सिंह, विशाल शुक्ला, डॉ. नरेश कुमार, राजीव भटनागर, शिव शंकर दूबे, शशि सिंह, एचएन मिश्र, राम कुमार रावत, वशिष्ठ नारायण तिवारी, महेंद्र कुमार पांडेय, अजय कुमार शुक्ला, एसपी मिश्र, राघवेंद्र कुमार गुप्ता और राम भजन मौर्य सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और मुद्दों पर चर्चा की।

कर्मचारी संगठनों की लगातार उपेक्षा

इस दौरान सभी वक्ताओं के विचार सुनने के बाद सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकाला गया कि पिछले नौ वर्षों से शासन द्वारा कर्मचारी संगठनों की लगातार उपेक्षा की जा रही है और उनकी जायज मांगें अब तक लंबित पड़ी हुई हैं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्मिक विभाग द्वारा समय-समय पर मुख्य सचिव के हस्ताक्षर से कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित मासिक बैठक करने के आदेश जारी किए जाते रहे हैं, लेकिन स्वयं शासन ही इन आदेशों का पालन नहीं कर रहा है। इस स्थिति पर कर्मचारियों में गहरा असंतोष और आक्रोश देखने को मिला।

समाधान के लिए होगा चरणबद्ध और प्रभावी आंदोलन

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी कर्मचारी संगठन अब एकजुट होकर एक मंच और एक बैनर के तहत अपनी मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए चरणबद्ध और प्रभावी आंदोलन चलाएंगे। साथ ही यह तय किया गया कि जो संगठन किसी कारणवश इस बैठक में शामिल नहीं हो सके, उनके साथ 8 अप्रैल 2026 को दोबारा बैठक आयोजित कर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आंदोलन को और मजबूत किया जा सके।