इप्सेफ के प्रतिनिधमंडल ने रक्षामंत्री से की मुलाकात: कर्मचारियों की बुनियादी समस्याओं को लेकर सौंपा ज्ञापन

लखनऊ। इण्डियन पब्लिक सर्विस इम्प्लाईज फेडरेशन का 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में भारत सरकार के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पर मिला। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने देशभर के कर्मचारियों और शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। बैठक के दौरान रक्षामंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि कर्मचारियों और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान जल्द किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी शिक्षक रह चुके हैं और इस कारण कर्मचारियों व शिक्षकों की समस्याओं और पीड़ा को भली-भांति समझते हैं।

वीपी मिश्र के नेतृत्व में उठाई गईं प्रमुख मांगें

इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्र के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने रक्षामंत्री से मुलाकात कर विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कर्मचारियों की मांगों पर तत्काल सार्थक निर्णय लिया जाए, ताकि बढ़ते असंतोष को समाप्त किया जा सके। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ उपाध्यक्ष एसबी सिंह, महासचिव प्रेमचंद्र, उपमहासचिव अतुल मिश्रा, सचिव शाह फैजल और उपाध्यक्ष सुरेश रावत सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

ज्ञापन में रखी गईं अहम मांगें

प्रतिनिधिमंडल ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को सौंपे ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से 8वें वेतन आयोग की संस्तुतियों को 1 जनवरी 2026 से लागू करने और इसका लाभ पेंशनरों को भी देने की बात शामिल है। इसके साथ ही पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की मांग भी उठाई गई, यह कहते हुए कि यूपीएस/एनपीएस व्यवस्था कर्मचारियों को स्वीकार नहीं है।

इसके अलावा आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाएं देने, शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से सेवानिवृत्ति के समय छूट देने तथा रिक्त पदों पर समयबद्ध नियुक्तियां और पदोन्नतियां सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई। चयन प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए आगामी रिक्त पदों के सापेक्ष अग्रिम चयन सूची तैयार करने का भी सुझाव दिया गया।

कर्मचारियों के हित में निर्णय का भरोसा

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए सहमति जताई और कर्मचारियों के हित में उचित निर्णय कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने दोहराया कि शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर विशेष संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाएगा, ताकि न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित हो सके।